29/12/2025
हाल ही में CBI बनाम कुलदीप सिंह सेंगर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए ज़मानत आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी। आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट किसी को दी गई ज़मानत पर बिना उसे सुने रोक नहीं लगाता, क्योंकि ज़मानत व्यक्ति की आज़ादी से जुड़ा मामला होता है। लेकिन इस मामले में हालात सामान्य नहीं थे।
अदालत ने देखा कि आरोपी पहले से ही एक दूसरे गंभीर मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। यह मामला आईपीसी की धारा 304 भाग-II से जुड़ा है, जिसमें मौत से संबंधित अपराध शामिल होता है। उस मामले में आरोपी अभी भी जेल में है और उसकी ज़मानत याचिका पर फैसला होना बाकी है। इसलिए, भले ही हाईकोर्ट ने एक केस में ज़मानत दी हो, लेकिन आरोपी की कुल स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करना ज़रूरी समझा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि इस केस में कुछ महत्वपूर्ण कानूनी सवाल हैं, जिन पर आगे विस्तार से सुनवाई होनी चाहिए। इन्हीं विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने हाईकोर्ट के ज़मानत आदेश की कार्रवाई पर रोक लगा दी, ताकि आरोपी फिलहाल जेल से बाहर न आए।
इसके साथ ही कोर्ट ने पीड़िता के अधिकारों पर भी ज़ोर दिया। अदालत ने साफ कहा कि पीड़िता को अलग से सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने का पूरा अधिकार है और इसके लिए उसे किसी विशेष अनुमति की ज़रूरत नहीं है। अगर पीड़िता आर्थिक रूप से सक्षम न हो, तो उसे मुफ्त कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
इस आदेश से यह बात साफ होती है कि ज़मानत कोई अपने-आप मिलने वाला अधिकार नहीं है। हर मामला उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर तय किया जाता है। अगर हालात असाधारण हों, तो अदालत सामान्य नियमों से हटकर भी फैसला ले सकती है। यह फैसला यह भी दिखाता है कि न्याय प्रणाली में केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि पीड़ित के अधिकारों को भी उतनी ही अहमियत दी जाती है।