कानून वकील आम नागरिक

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कानून वकील आम नागरिक Adv. आदित्य शर्मा
तीस हजारी कोर्ट,
दिल्ली

13/03/2026

दिल्ली लोक अदालत 14 मार्च को नहीं लगेगी

11/03/2026

अब नहीं चलेगा चैक बाउंस का मुकदमा

05/03/2026

लोक अदालत में चालान क्लियर









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​ loan settlement How To Settle Loan In Lok Adalat?



























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02/03/2026

अगर आपको लगता है कि झूठी FIR दर्ज कराकर किसी को भी फंसा देना आसान है…
तो अब सावधान हो जाइए।

क्योंकि अगर FIR झूठी निकली —
तो जेल भी हो सकती है और मुआवज़ा भी देना पड़ सकता है।

नमस्कार मैं advocate आदित्य शर्मा तीस हजारी कोर्ट दिल्ली से

⚖️ Supreme Court of India ने साफ कहा है कि
किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मुकदमे में फंसाना
उसके अनुच्छेद 21 के तहत मिले
“सम्मानपूर्वक जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता” के अधिकार का उल्लंघन है।

1992 के ऐतिहासिक फैसले
State of Haryana v. Bhajan Lal में

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि
अगर FIR दुर्भावना से दर्ज की गई हो,
तो उसे रद्द किया जा सकता है।

अब बात करते हैं कार्रवाई की —

अगर FIR झूठी साबित होती है, तो:

🔹 IPC की धारा 182 – पुलिस को झूठी सूचना देने पर
6 महीने तक की सजा या जुर्माना।

🔹 धारा 211 – झूठा आपराधिक आरोप लगाने पर
2 साल तक की सजा,
और अगर आरोप गंभीर अपराध का हो
तो 7 साल तक की सजा।

🔹 धारा 193 – झूठे सबूत देने पर
7 साल तक की सजा।

🔹 धारा 500 – मानहानि के लिए
2 साल तक की सजा या जुर्माना।

साथ ही, कोर्ट, पीड़ित व्यक्ति को मुआवज़ा भी दिला सकती है।

याद रखिए —
कानून बदले का हथियार नहीं है।
निर्दोष को फंसाना खुद एक अपराध है।

हर व्यक्ति को
सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।
अगर वीडियो acchi लगी हो तो like कीजिए or अपने अधिकारों को जानने के लिए चैनल को subscribe कीजिए, धन्यवाद

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02/03/2026

अब 7 साल से कम सजा वाले केस में गिरफ्तारी नहीं होगी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,

Address

Tis Hazari Courts Delhi
Delhi
110007

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