17/09/2023
सावजी भाई ढोलकिया
जन्म - 12 अप्रैल 1962 (अमरेली, गुजरात)
शिक्षा- चौथी पास
पत्नी - गौरीबेन ढोलकिया
संस्थापक- हरिकृष्ण ग्रुप
छह हजार करोड़ रु. की कंपनी लेकिन अपने ही MBA बेटे से करवाई मजदूरी, क्यों-
• 600 कर्मचारियों को दीपावली पर तोहफे में कार
• 900 को फिक्स्ड-डिपॉजिट दिए
• फ्लैट्स, जूलरी सेट,
• इंश्योरेंस पॉलिसी दे चुके हैं।
सूरत.
• तब सावजी भाई महज 12 साल के थे, जब उन्होंने सूरत पहुंचकर हीरा घिसने का काम शुरू किया था। उस समय सावजी भाई को तनख्वाह में महज 180 रुपए मिलते थे। आज उनकी कंपनी 6 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा की है।
• हालांकि, इसके बावजूद अपने बेटे द्रव्या को जिंदगी का सबक सिखाने के लिए एक महीने के लिए केरल भेज दिया, वह भी केवल सात हजार रुपए देकर।
• द्रव्या ने अमेरिका से MBA किया था, लेकिन सावजी भाई चाहते थे कि उनका बेटा असल जिंदगी में मैनेजमेंट करना सीखे।
यहां भी रख दी 3 शर्तें
1. पहली, एक हफ्ते से ज्यादा कहीं काम नहीं करना है, मतलब अलग-अलग जगह का अनुभव लेना है।
2. दूसरी, सात हजार रुपए सिर्फ आपात स्थिति में ही खर्च करने हैं। यानी रोजमर्रा के काम के लिए उसे वहां कमाए पैसे ही इस्तेमाल करने हैं।
3. तीसरी, उसे कहीं भी अपने पिता का नाम या रसूख का इस्तेमाल नहीं करना है।
द्रव्या ने वहां फूड आउटलेट और जूतों की दुकान तक में काम किया।
सावजी भाई ने 12 साल पहले अपने भाई के बेटों को भी इसी तरह से दूसरे शहरों में काम करने के लिए भेज दिया था।
जानिए इस पर क्या कहना है सावजी भाई का
जब बच्चों के हाथ में पैसा होता है और उन्होंने किसी तरह की कोई आर्थिक परेशानी नहीं देखी होती तो ऐसे में
• संवेदनाओं,
• मानवीय मूल्यों
• और असल जिंदगी के संघर्षों
की सीख के लिए हमें इस तरह के रास्ते अख़्तियार करने पड़ते हैं। अगर जिंदगी में इस तरह के पाठ सीखने को मिल जाएं तो परिस्थितियों से निबटने के रास्ते इंसान को खुद-ब-खुद मिल ही जाते हैं।'
खुद 10 साल तक हीरा घिसाई का काम किया
सावजी भाई के पिता छोटे-से किसान थे।
घर में पैसों की तंगी के चलते 12 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी
और चाचा के पास सूरत आ गए। उन्होंने 10 साल तक हीरा घिसाई का काम किया।
आज उनके ब्रांड 'कृष्णा डायमंड ज्वेलरी' के देशभर में 6500 से भी अधिक आउटलेट हैं।
ये है सावजी भाई का ध्येय
सावजी भाई के अनुसार जिंदगी में सफलता और काम में फायदा
1 अनुभव
2 और ज्ञान
को एप्लाई करने से मिलता है।
चाहे थोड़ा पढ़ा और सीखा हो, उसे ज्यादा से ज्यादा एप्लाई करना चाहिए।
सावजी भाई पहली बार 2014 में चर्चा में आए थे,
जब उन्होंने अपने कर्मचारियों को
200 फ्लैट,
491 कारें
और 525 डायमंड जूलरी के सेट उपहार में दिए थे।
उसके बाद 2015-16 में भी हजारों कर्मचारियों को दीपावली पर तोहफे में कार-फ्लैट्स दिए।