Vipin Poria Advocate

Vipin Poria Advocate Advocate at Supreme Court of India -3rd Generation Lawyer- Religion Const. of India. Mob. 9312159058

02/06/2026

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि यदि किसी पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में CrPC की धारा 164 के तहत अभियुक्त का इकबालिया बयान (confession) दर्ज किया जाता है, तो वह कानूनी रूप से अग्राह्य (inadmissible) हो जाता। Jiten Engti VS. State of Assam; Gauhati High Court on 25/05/2026.

02/06/2026

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बस ड्राइवर से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह पीछे मुड़कर देखे कि यात्री सुरक्षित रूप से उतरे या नहीं । यदि ड्राइवर कंडक्टर के इशारे (सीटी/सिग्नल) पर बस आगे बढ़ाता है, तो उसे यात्री के गिरने या दुर्घटना के लिए आपराधिक रूप से लापरवाह नहीं माना जा सकता ।
Mohammad Hanif Jainum Khalifa VS. State of Karnataka; Supreme Court on 27/05/2026.

02/06/2026

सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले के अनुसार, पुलिस के लिए क्लोजर रिपोर्ट (जांच बंद करने की रिपोर्ट) या चार्जशीट दाखिल करने के बाद किसी भी ‘आगे की जांच’ (Further Investigation) के लिए मजिस्ट्रेट या संबंधित अदालत की स्पष्ट अनुमति लेना अनिवार्य है।
Paliniswamy Veeraraja VS. State of Karnataka; Supreme Court on 26/05/2026.

02/06/2026

सुप्रीम कोर्ट ने वैज्ञानिक सबूतों जैसे DNA और पुख्ता सबूतों (Incomplete Chain of Circumstances) के अभाव के कारण हत्या और बलात्कार के आरोप में मौत की सजा काट रहे दो दोषियों को बरी कर दिया। Mehtab VS. State of Uttarakhand; Supreme Court on 27/05/2026.

01/06/2026

Commercial Court Act. What Is Commercial Suits? कमर्शियल केस क्या हैं? कहाँ फाइल होते हैं?

01/06/2026

After Notary Marriage, R**e FIR, Tripura High Court Quashed.

01/06/2026

सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के अनुसार, यदि कोई अपीलीय अदालत किसी बरी किए गए व्यक्ति (acquittal) को दोषी ठहराती है, तो उसे सजा (sentence) पर स्वयं सुनवाई करनी होगी। वह इस कार्य के लिए मामले को केवल सजा सुनाने हेतु ट्रायल कोर्ट (Trial Court) को वापस नहीं भेज सकती। Mukesh Kumar Yadav VS. State (UT Andaman& Nicobar Island; Supreme Court on 26/05/2026.

31/05/2026

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि यदि सभी संपत्तियों के लिए मुकदमे का कारण (Cause of Action) एक ही है, तो अलग-अलग जगहों पर स्थित विभिन्न संपत्तियों के बंटवारे (partition) का मुकदमा किसी भी एक क्षेत्राधिकार वाले कोर्ट/ न्यायालय में दायर किया जा सकता है। P.V Surendram VS. Kavitha Rajendran, RFA 149/16; Kerala High Court on 25/05/2026.

31/05/2026

Stay In Civil Cases
ज़मीनी केसों में स्टे।

31/05/2026

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 1978 के एक मौखिक समझौते (oral agreement) को वैध मानते हुए संपत्ति के सौदे को पूरा करने (Specific Performance) का आदेश दिया है। हालांकि, संपत्ति की कीमतों में भारी उछाल को देखते हुए अदालत ने संतुलन बनाने के लिए याचिकाकर्ता (खरीदार) को अतिरिक्त ₹25,00,000 (25 लाख रुपये) का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
MK Madhavan (Deleted) Nanlini W/o MK Madhavan VS Shri R Subramaniam (Deleted) Rajesh R Subramaniam, FA No. 235/2008; Bombay High Court on 01/04/2026.

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110001

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