31/05/2026
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) भारत में आपदाओं (जैसे भूकंप, बाढ़, चक्रवात, महामारी आदि) के प्रभावी प्रबंधन के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इसका उद्देश्य आपदा से पहले तैयारी, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया और आपदा के बाद पुनर्वास सुनिश्चित करना है।
📜 अधिनियम का परिचय- यह अधिनियम 23 दिसंबर 2005 को लागू हुआ। इसे भारत सरकार ने देश में एक समन्वित आपदा प्रबंधन प्रणाली बनाने के लिए पारित किया। इसका दायरा राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर तक फैला हुआ है।
🏛️ मुख्य संस्थाएँ-
इस अधिनियम के तहत कई प्रमुख संस्थाएँ बनाई गईं-
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)
अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री
कार्य: राष्ट्रीय स्तर पर नीतियाँ और दिशानिर्देश तय करना
2. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA)
अध्यक्ष: संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री
कार्य: राज्य स्तर पर योजनाएँ बनाना
3. जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA)
अध्यक्ष: जिला कलेक्टर/जिलाधिकारी
कार्य: स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन
⚙️ प्रमुख प्रावधान-
•आपदा प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय योजना और राज्य योजना बनाना।
•आपदा के समय राहत और पुनर्वास कार्यों का संचालन।
•पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) को मजबूत करना।
•विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय (Coordination) सुनिश्चित करना।
•नागरिकों और संस्थानों के लिए दिशानिर्देश और नियम तय करना।
🚨 विशेष शक्तियाँ- इस कानून के तहत सरकार को आपातकालीन स्थिति में विशेष अधिकार मिलते हैं, जैसे:
•लोगों की आवाजाही पर नियंत्रण,
•संसाधनों का अधिग्रहण (जैसे अस्पताल, परिवहन),
•आवश्यक सेवाओं को सुनिश्चित करना।
👉 इसी अधिनियम के तहत COVID-19 महामारी के दौरान पूरे देश में लॉकडाउन लागू किया गया था।
🎯 उद्देश्य-
•जान-माल की हानि को कम करना।
•आपदा के प्रभाव को न्यूनतम करना।
•त्वरित राहत और पुनर्वास।
•दीर्घकालीन आपदा-प्रबंधन रणनीति विकसित करना।
कानून “हम सबके लिए”