YOGI LLB

YOGI LLB योगेश कुमार सक्सेना (एडवोकेट)
कलेक्ट्रेट परिसर, (बदायूं)
मो:- 094128 57689 , 9917549654

23/08/2026
28/06/2026

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तलाक (DIVORCE)तलाक की प्रक्रिया दो प्रकार की होती है: आपसी सहमति से (Mutual Consent) और आपसी सहमति के बिना/विवादित (Cont...
14/06/2026

तलाक (DIVORCE)

तलाक की प्रक्रिया दो प्रकार की होती है:

आपसी सहमति से (Mutual Consent) और आपसी सहमति के बिना/विवादित (Contested Divorce)।

आपसी सहमति में प्रक्रिया जल्दी पूरी होती है, जबकि विवादित तलाक में पति या पत्नी में से कोई एक पक्ष अदालत में याचिका दायर करता है और इसमें कुछ महीने से लेकर कुछ साल तक का समय लग सकता है।

आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent)

इसमें दोनों पति-पत्नी की शादी के बंधन से कानूनी रूप से अलग होने पर सहमति होती है।

शर्तों पर समझौता: दोनों पक्षों को बच्चों की कस्टडी, गुजारा भत्ता (Alimony), और संपत्ति के बंटवारे पर आपसी समझौता करना होता है।

याचिका दायर करना (First Motion): पारिवारिक अदालत (Family Court) में दोनों पक्षों के हस्ताक्षर के साथ एक संयुक्त याचिका दायर की जाती है।

अदालत में पेशी: अदालत दोनों पक्षों के बयान दर्ज करती है और याचिका की जांच करती है।

सुलह की अवधि (Cooling-off Period): कानून के अनुसार, पहला मोशन पूरा होने के बाद 6 महीने का समय दिया जाता है, ताकि पति-पत्नी अपने रिश्ते को बचाने के बारे में दोबारा विचार कर सकें।

अंतिम सुनवाई (Second Motion): 6 महीने पूरे होने के बाद या अदालत द्वारा छूट (Waiver) देने पर, दूसरा मोशन दाखिल किया जाता है। इसके बाद जज तलाक की मंजूरी दे देते हैं।

विवादित तलाक (Contested Divorce)

यदि एक पक्ष तलाक के लिए तैयार नहीं है, तब दूसरा पक्ष निम्नलिखित आधारों (Grounds) पर अदालत में याचिका दायर कर सकता है:
क्रूरता (Cruelty), परित्याग (Desertion), व्यभिचार (Adultery), या धर्म परिवर्तन।

याचिका दायर करना: जो पक्ष तलाक चाहता है, वह अपने वकील के माध्यम से अदालत में याचिका और सभी सबूत (Evidence) जमा करता है।

दूसरे पक्ष को समन: अदालत दूसरे पक्ष (पति/पत्नी) को नोटिस भेजकर जवाब देने के लिए बुलाती है।

मध्यस्थता (Mediation): अदालत सुलह कराने के लिए काउंसलिंग या मध्यस्थता का प्रयास करती है।

गवाही और क्रॉस-एग्जामिनेशन: यदि सुलह नहीं होती है, तो दोनों पक्षों के वकील अदालत में गवाह पेश करते हैं और जिरह (Cross-examination) होती है।

फैसला: सभी सबूतों और बयानों के आधार पर, अदालत तलाक की अंतिम डिक्री (Decree) पारित करती है।

आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)

विवाह का प्रमाण पत्र (Marriage Certificate)

10/06/2026

⚖️ क्या शादी का वादा पूरा न करना हमेशा अपराध होता है? कोर्ट ने दिया अहम फैसला! 😳📜

🏛️ इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) का महत्वपूर्ण निर्णय

हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में स्पष्ट किया कि किसी विवाहित महिला से प्रेम संबंध होने के बाद विवाह का वादा पूरा न करना अपने आप में अपराध नहीं माना जाएगा, विशेषकर तब जब महिला का अपने पति से विवाह-विच्छेद (Divorce) भी नहीं हुआ हो।

📌 मामले के अनुसार, महिला ने आरोप लगाया था कि उसका अभियुक्त के साथ कई वर्षों से प्रेम संबंध था। संबंधों के दौरान वह गर्भवती हुई, बाद में उसका गर्भपात कराया गया तथा अभियुक्त विवाह का आश्वासन देता रहा, लेकिन विवाह नहीं किया।

📌 सत्र न्यायालय ने अभियुक्त को दुराचार एवं भ्रूण हत्या के आरोपों से उन्मोचित (Discharge) कर दिया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

⚖️ कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

✅ उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट था कि महिला ने अपनी इच्छा से संबंध बनाए थे।

✅ रिकॉर्ड पर ऐसा कोई पर्याप्त प्रमाण नहीं था जिससे दुराचार (R**e) का आरोप प्रथम दृष्टया सिद्ध हो सके।

✅ महिला विवाहित थी और उसका विवाह-विच्छेद नहीं हुआ था, इसलिए विवाह न होने मात्र से अपराध नहीं बनता।

✅ भ्रूण हत्या के आरोप के समर्थन में पर्याप्त एवं विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं पाए गए।

📚 कानूनी संदेश:
हर मामले में केवल “शादी का वादा” ही अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होता। अदालत परिस्थितियों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों के आचरण का समग्र मूल्यांकन करती है।

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09/06/2026

यूपी पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बेहद सख्त रुख! 🚨 ग्राम प्रधानों को लग सकता है झटका?

यूपी सरकार ने हाल ही में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 6 महीने बढ़ाकर उन्हें प्रशासक नियुक्त किया था, लेकिन अब इस फैसले पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है! ⚖️

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य निर्वाचन आयोग और यूपी सरकार से तीखे सवाल किए हैं। कोर्ट ने साफ शब्दों में पूछा है कि सरकार अदालत को बताए कि यूपी पंचायत चुनाव आखिर किस तारीख को कराए जाएंगे?

इस पूरे मामले की अगली और बेहद अहम सुनवाई 10 जुलाई को तय की गई है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि 10 जुलाई को ही ओबीसी आयोग की रिपोर्ट भी अदालत में पेश की जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद यूपी में पंचायत चुनाव जल्द होंगे या फिर प्रधान प्रशासक बने रहेंगे? आपकी इस पर क्या राय है? क्या चुनाव जल्द से जल्द होने चाहिए?

अपनी राय हमें कमेंट्स में जरूर बताएं और पंचायत चुनाव से जुड़ी इस सबसे बड़ी खबर को अपने सभी ग्रुप्स में शेयर करें! 👇

डिस्क्लेमर: यह जानकारी वर्तमान मीडिया रिपोर्ट्स और न्यूज़ अपडेट्स पर आधारित है। चुनाव से जुड़ी किसी भी आधिकारिक घोषणा और अपडेट के लिए कृपया राज्य निर्वाचन आयोग और संबंधित सरकारी निर्देशों का ही संदर्भ लें।

#यूपी_पंचायत_चुनाव #ग्राम_पंचायत

09/06/2026

🏛️ “ठोस सबूत के बिना आरोपी को पूरे दिन पुलिस स्टेशन में नहीं बिठाया जा सकता” — राजस्थान हाईकोर्ट

⚖️ हत्या मामले की जांच से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को पूरे दिन थाने में बैठाकर नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने हेतु मामले की निगरानी के निर्देश भी दिए।

📌 Gangasahay & Ors. v. State of Rajasthan & Anr.

Sandeep Dixit Adv. राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर Follow On Sandeep Dixit Adv

⚖️ किसान को लूंगी में घसीटकर थाने ले गई पुलिस, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को ₹25,000 मुआवजा देने का आदेश दियाइलाहाब...
09/06/2026

⚖️ किसान को लूंगी में घसीटकर थाने ले गई पुलिस, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को ₹25,000 मुआवजा देने का आदेश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक किसान को ₹25,000 मुआवजा और ₹10,000 मुकदमे का खर्च अदा करे। अदालत ने पाया कि पुलिस ने व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन किया।

📌 क्या है मामला?

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह अपने गांव में कृषि कार्य देखने आया था। आरोप है कि एक घरेलू विवाद की शिकायत के बाद पुलिस अधिकारी उसके घर पहुंचे, उसे केवल लूंगी और कुर्ते में घर से बाहर घसीटकर पुलिस चौकी और फिर थाने ले गए, जहां उसे करीब 24 घंटे तक हिरासत में रखा गया।

⚖️ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की खंडपीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक या मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए बिना हिरासत में रखना कानून के खिलाफ है। अदालत ने माना कि पुलिस अधिकारी ने राज्य की शक्ति का उपयोग करते हुए याचिकाकर्ता की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अवैध हनन किया।

📂 कोर्ट ने पुलिस के तर्क खारिज किए

पुलिस की ओर से यह कहा गया था कि दोनों पक्ष स्वयं थाने आए थे और समझौता हुआ था। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि यह मानना कठिन है कि किसी विवाद में फंसा व्यक्ति स्वेच्छा से पुलिस अधिकारी के सामने समझौते के लिए पहुंचेगा।

⚠️ व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर जोर

अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को यह नहीं समझना चाहिए कि उनके अधिकार असीमित हैं। नागरिकों की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा संरक्षित है और उसका उल्लंघन गंभीर संवैधानिक मुद्दा है।

💰 कोर्ट का आदेश

👉 यूपी सरकार याचिकाकर्ता को ₹25,000 मुआवजा दे
👉 ₹10,000 मुकदमे का खर्च भी अदा किया जाए
👉 अवैध हिरासत को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना गया।

📢 कानूनी महत्व

✔️ अवैध हिरासत पर राज्य की जवाबदेही तय
✔️ अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा
✔️ पुलिस की मनमानी कार्रवाई पर न्यायिक नियंत्रण
✔️ मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर मुआवजा देने के सिद्धांत की पुष्टि

📢 बड़ा संदेश:
किसी भी नागरिक को बिना कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में नहीं रखा जा सकता। पुलिस कानून से ऊपर नहीं है और व्यक्तिगत

11/03/2026

आवश्यक सूचना :-
सभी लोगो को सूचित किया जाता है कि बदायूं जिले के *जनपद न्यायालय बदायूं में 14 मार्च 2026 दिन शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत है* जिसमें समस्त प्रकार के मुकदमे *बिजली बिल और बिजली चोरी के मुकदमे, दो पहिया एवं चार पहिया ट्रैफिक चालान, चेक बाउंस, KCC, लोन, NI एक्ट, जुआ का मुकदमा, पुराने मुकदमें और परिवारिक मुकदमे, EX एक्ट अर्थात दारू के मुकदमे, रोड अतिक्रमण* सभी प्रकार के मुकदमे का निस्तारण किया जाएगा ।। आवश्यक जानकारी के लिए संपर्क करें
*एडवोकेट योगेश कुमार सक्सेना
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मोबा 9412857689

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