18/06/2026
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: BNSS के तहत आरोपी को सुने बिना Cognizance नहीं लिया जा सकता
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) लागू होने के बाद किसी Complaint Case (जैसे PMLA Complaint) में न्यायालय Cognizance लेता है, तो Section 223(1) के प्रथम प्रावधान (First Proviso) का पालन करना अनिवार्य है।
📌 क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
✅ Cognizance लेने से पहले आरोपी को सुनवाई (Pre-Cognizance Hearing) का अवसर देना अनिवार्य है।
✅ यह केवल प्रक्रिया नहीं, बल्कि Article 21 के तहत निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) का संवैधानिक अधिकार है।
✅ यदि आरोपी को सुने बिना Cognizance लिया जाता है, तो ऐसा आदेश Void Ab Initio (शुरू से ही अवैध) माना जाएगा।
✅ आरोपी को यह साबित करने की आवश्यकता नहीं कि उसे इससे कोई नुकसान (Prejudice) हुआ है। सुनवाई का अवसर न देना स्वयं में गंभीर कानूनी त्रुटि है।
✅ यह नियम तब भी लागू होगा जब शिकायत (Complaint) BNSS लागू होने से पहले दायर हुई हो, लेकिन Cognizance BNSS लागू होने के बाद लिया गया हो।
⚖️ इस निर्णय का महत्व
यह फैसला प्रत्येक आरोपी के प्राकृतिक न्याय (Principles of Natural Justice) और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को मजबूत करता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि बिना आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाए किसी के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही आगे न बढ़े।
🏛️ Case: Parvinder Singh v. Directorate of Enforcement
Giri Ranjit Advocate Ranjit Giri