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24/08/2026
15/08/2026

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*​इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: रिट याचिका हेतु फोटो सत्यापन के लिए कोर्ट आना जरूरी नहीं*​इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ ख...
31/07/2026

*​इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: रिट याचिका हेतु फोटो सत्यापन के लिए कोर्ट आना जरूरी नहीं*
​इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण और जनहितकारी आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट में रिट याचिका (Writ Petition) दाखिल करने के लिए वादी (Petitioner) या उनके अधिवक्ता को फोटो वेरिफिकेशन (सत्यापन) हेतु स्वयं हाईकोर्ट उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है।
​माननीय न्यायमूर्ति आलोक माथुर तथा न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने फोटो एफिडेविट आइडेंटिफिकेशन व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
​निर्णय के मुख्य बिंदु:
​देशभर के नोटरी द्वारा सत्यापित शपथपत्र मान्य: अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि देश में किसी भी अधिकृत नोटरी पब्लिक (Notary Public) द्वारा सत्यापित (Attested) किया गया शपथपत्र (Affidavit) रिट याचिका के साथ कानूनी रूप से पूरी तरह वैध माना जाएगा।
​पक्षकारों व अधिवक्ताओं को राहत: इस फैसले से दूर-दराज के क्षेत्रों और जिलों में रहने वाले मुकदमों के पक्षकारों तथा अधिवक्ताओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। अब उन्हें केवल फोटो सत्यापन के लिए लंबी दूरी तय करके हाईकोर्ट नहीं आना पड़ेगा, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
​"यह निर्णय न्याय प्रक्रिया को सुलभ और व्यावहारिक बनाने की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय कदम है।"

फहीम अख्तर (FAHEEM AKHTAR)
नोटरी एडवोकेट, भारत सरकार (Notary Advocate, Govt. of India)
बिजनौर (उत्तर प्रदेश)

दिल्ली हाईकोर्ट की माननीय जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने Prem Singh v. C.S. Rathore मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए ...
22/06/2026

दिल्ली हाईकोर्ट की माननीय जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने Prem Singh v. C.S. Rathore मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि यदि क्लाइंट और वकील के बीच यह सहमति हुई हो कि मुकदमे में मिलने वाले मुआवज़े की राशि से वकील की प्रोफेशनल फ़ीस का भुगतान किया समायोजित किया जाएगा ।

प्रार्थना पत्र दोष मुक्त करने हेतक्रिमिनल प्रैक्टिस में कदम रखने वाले नए वकीलों और लॉ स्टूडेंट्स के लिए ड्राफ्टिंग सीखना...
21/05/2026

प्रार्थना पत्र दोष मुक्त करने हेत

क्रिमिनल प्रैक्टिस में कदम रखने वाले नए वकीलों और लॉ स्टूडेंट्स के लिए ड्राफ्टिंग सीखना सबसे महत्वपूर्ण स्किल्स में से एक है। आज हम बात कर रहे हैं Section 232 CrPC के तहत 'दोषमुक्ति (Acquittal)' के आवेदन की।

📌 Section 232 क्या कहता है?
जब Sessions Court में अभियोजन (Prosecution) की गवाही खत्म हो जाती है, और जज को लगता है कि आरोपी के खिलाफ अपराध साबित करने के लिए कोई सबूत (Evidence) नहीं है, तो बचाव पक्ष (Defence) धारा 232 के तहत आरोपी को बरी (Acquit) करने की मांग कर सकता है।

💡 एक अच्छे ड्राफ्ट में क्या-क्या होना चाहिए?:

1️⃣ सटीक केस डिटेल्स: न्यायालय का नाम, FIR नंबर, और धाराएं स्पष्ट रूप से लिखें।
2️⃣ गवाही पूरी होने का जिक्र: यह स्पष्ट करें कि Prosecution Evidence (PE) बंद हो चुका है।
3️⃣ सबूतों का अभाव: कोर्ट को बताएं कि गवाहों के बयानों और दस्तावेजों में आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
4️⃣ समय की बर्बादी: यह तर्क दें कि जब कोई भौतिक साक्ष्य (Material Evidence) ही नहीं है, तो मुकदमा आगे चलाना केवल माननीय न्यायालय के समय की बर्बादी होगी।
5️⃣ स्पष्ट प्रार्थना (Prayer): अंत में धारा 232 के तहत बरी करने का विनम्र निवेदन करें।

NOTE:- हम जानते हैं कि अब नए आपराधिक कानून लागू हो चुके हैं और कई लोग कमेंट्स में यह सवाल पूछेंगे!
कृपया ध्यान दें: यह ड्राफ्ट पुराने मुकदमों के लिए CrPC की धारा 232 के तहत है।
नए कानून (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita - BNSS, 2023) के तहत Sessions Trial में Acquittal का यही प्रावधान अब 'धारा 254 (Section 254 of BNSS)' में दिया गया है। ड्राफ्टिंग का मूल तरीका और फॉर्मेट यही रहेगा, बस आपको नए मुकदमों के लिए CrPC 232 की जगह BNSS 254 लिखना होगा!

अगर आपको यह ड्राफ्टिंग फॉर्मेट मददगार लगा, तो इस पोस्ट को SAVE करें और अपने लॉ कॉलेज के दोस्तों के साथ SHARE करें! 🙌

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Disclaimer:
यह पोस्ट केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्यों के लिए तैयार की गई है। इसे कानूनी सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। चूँकि हर मामला अपने आप में अलग होता है, इसलिए इस पोस्ट आपको अधूरी लग सकती है। इसके साथ दी गई छवि भी पूरी तरह से शिक्षा के उद्देश्यों के लिए प्रदान की गई है; यह प्रामाणिक (authentic) नहीं है। इसलिए, कृपया इस छवि को डाउनलोड या प्रिंट न करें, और न ही इसका किसी भी रूप में उपयोग करें; इसे केवल उदाहरण के तौर पर बनाया गया है।

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