10/05/2026
#जांगलदेश_का_प्रथम_और_अंतिम_गणराज्य
प्रथम पट्टी पुनियां कहीजै, गादी ज्यांरी झांसल रहीजै।
तखत तीन सौ साठ झैले, कीरत वांरी चहुं दिस फैलै।
झांसल से लेकर लुदि तक एकछत्र पुनियों का राज था। पुनिया गणराज्य में 360 गांव थे। सर्वप्रथम जांगलदेश पर पुनियों का ही गणराज्य स्थापित हुआ था। बाद में अन्य जाट गणराज्यों में गोदारा, सारण, कस्वां, सोहू, सियाग और बैनिवाल आदि ने पुनियों का अनुसरण किया।
*कान्ह कहे पुनिया सुणो, लुदी छुटे थे झांसल गिणो।*
*पुनिया कहे कान्ह जणो, लुदी छुटे पर गढ थैई चीणो।*
कान्होजी पूनिया का बीका राठोड़ से संघर्ष शुरू हुआ था। लुदी छुटी, कान्हा छुटा। पर कान्होजी को दिया वचन नहीं छुटा। पुनियों ने लुदी में गढ नहीं बनाने दिया।
*बीके तुरी फिराविया, जांगल तणो जोर।*
*सींव घोड़ा सरके ना, पाछल पुनिया ओर।*
*हिनहिन करे हिंवर, पाछा मुड़िया पग।*
*बीके सूं कर बैर, ऐड़ा कुण जीवे जग्ग।*
*पुनिया तणो प्रहार, देखेला दुनिया अगोअग्ग।*
*बीकै सूं कर बैर, देखो पुनिया जीवे है जग्ग।*
पुनियां गणराज्य सबसे लंबा टिकने वाला गणराज्य था। बीका जब पुरे जांगलदेश पर घोड़ा दोड़ा रहा था तो पुनियों की सरहद पर आकर उनका घोड़ा हिनहिनाने लगा और पैर पीछे खींचने लगा। पुनियों ने लंबे समय तक राठोड़ो से संघर्ष किया। अकबर के समकालीन पुनियों के पास 150 घुड़सवार और 3000 पदाति सैनिक बचे थे।
आज भुले बिसरे टुटे फुटे छंदो में पुनियों का इतिहास सिमटकर रह गया है। कुछ चंद लाइने बही भाटों के पास में है तो कुछ टूटे फुटे छंद कविराज ढाढियों के पास। बस इतना ही बचा है जो इन अंतिम पीढी के पास है।
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*राजकुमार गोदारा विसनोई*
*विसनोई साहित्य एवं इतिहास शोधार्थी*