19/04/2026
मोदी ने भीषण हुंकार किया,
अपना स्वरूप-विस्तार किया,
डगमग-डगमग दिग्गज डोले,
प्रधान कुपित होकर बोले
कर सके प्रपंच, तो साध मुझे,
राहुल ओ राहुल ! बाँध मुझे।
यह देश सकल मुझमें लय है,
रेट यहां सबका तय है,
मुझमें विलीन सब न्यायमूर्ति,
मुझमें विलीन पै'केजपूर्ति
प्रमोशन खेलते है मुझमें,
कॅरियर डूबते है मुझमें।
गौतम मेरा है दीप्तभाल,
है अनिल मेरा वक्षस्थल विशाल,
भगत परिधि- वृंद घेरे हैं,
आईबी-ईडी पग मेरे हैं।
लाठी, टोपी, भगवे, निक्कर,
सब हैं मेरे बक्से अन्दर।
दृग हों तो दृश्य अकाण्ड देख,
मुझमें सारा ब्रह्माण्ड देख,
चर-अचर जीव, जग, क्षर-अक्षर,
नश्वर मनुष्य है पार्टी अमर।
शत कोटि बूथ, शत कोटि मत,
शत कोटि पैंतरे, जबरजस्त
शत कोटि रुपये, शत कोटि चाल,
शत कोटि रन्ध्र, सिस्टम के काल
हो सके अगर तो साध इन्हें,
राहुल ओ राहुल, बाँध इन्हें।
टीवी, मीडिया, समाचार देख,
ये झूठ भरे अखबार देख
यह देख, खबर का फेक सृजन,
ये देख विज्ञापन का अर्पण,
पेड़-न्यूज, से पटी भू है,
चल खोज, इसमें कहाँ तू है।
शक्लो में मुर्दन जाल देख,
जन के नीचे पाताल देख,
मुट्ठी में तीनों काल देख,
मेरा स्वरूप विकराल देख।
सब कष्ट मुझी से पाते हैं,
फिर लौट मुझी में आते हैं।
जिह्वा से कढ़ती ज्वाल सघन,
जेबों में भरा हुआ है धन
पड़ जाती मेरी दृष्टि जिधर,
सरकार बनी हर कीमत पर
मैं जभी खोलता हूँ लोचन,
प्रतिनिधि आते बिकने स्वयं
बाँधने मुझे तू आयी है,
प्रपंच बड़े क्या लाई है?
लड़ने की हिम्मत लायेगा,
क्या धूर्त बड़ी बन पाएगा??
जो मशीन साध न सकती है,
वो मुझे बांध क्या सकती है
तो ले, मैं अब जाता हूँ,
अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ।
इलेक्शन नहीं, अब रण होगा,
और रिजल्ट मरण होगा।
फण शेषनाग का डोलेगा,
विकराल काल मुँह खोलेगा।
हिन्दू मुस्लिम कर लूटेंगे ,
विष-बाण बूँद-से छूटेंगे,
वायस-श्रृगाल सुख लूटेंगे,
सौभाग्य कर्नाटक के फूटेंगे।
आखिर तू भूशायी होगी,
कुर्सी की पर, दायी होगी।
कुर्सी की पर, दायी होगी