28/07/2023
मणिपुर में विवाद की असल जड़ है hill districts के लिए बनी एक नई इविक्शन पॉलिसी , यह कुकी बनाम मैती उतना है नहीं जितना सोचा जा रहा है । कुकी मैती विवाद तो मई में शुरू हुआ ।
मध्य फरवरी में hill districts ke ३८ गांवों में एकसाथ इविक्शन ड्राइव हुई थी , बवाल तब भी बहुत अधिक हुआ था , दरअसल सरकार जिसे encroachment बता कर इविक्शन के लिए उपयुक्त बता रही थी उसे गांव वाले settlement लैंड बता रहे हैं क्योंकि उनका कहना है की उनके पास उसके डॉक्यूमेंट्स हैं । जाहिर सी बात है की फिर ये डिस्प्यूट है और इसका निपटारा सिर्फ कोर्ट कर सकती है , लेकिन इसकी तैयारी भी पहले से हो चुकी थी वर्ष 2021 में एक कानूनी प्रावधान तैयार किया गया था जो इस प्रकार है -
"Manipur Forest Rules, 2021, Rule number 73, which empowers Forest Officers to evict any encroachment/trespass on forest land. It also particularly says, encroachers can be evicted without notice."
इस प्रावधान के पूर्व 1927 और 1960 के जो कानून प्रभावी थे उनके अनुसार hill district के सेटलमेंट एरियाज में बगैर नोटिस और पहले से रह रहे लोगों की बात को सुने और विशेष परिस्थिति में पुनर्वास आदि का विचार किए इविक्शन संभव नहीं था जिसे 2021 में बदल दिया गया और जो नया प्रावधान तैयार हुआ वह प्राकृतिक न्याय के अनुरूप भी नहीं की बगैर कुछ सुने या नोटिस के भी विस्थापित किया जा सकता है वह भी फारेस्ट ऑफिसर्स के द्वारा ।
सवाल है बड़ी संख्या में इविक्शन ड्राइव से हासिल क्या होगा ? सीधी बात है पहाड़ों के सेटलमेंट एरियाज पर स्टेट का कब्जा बढ़ेगा, कुकी कमजोर होंगे तो प्रोटेक्टेड फारेस्ट एरिया की जो जमीन है उसमें भी परिवर्तन के जरिए बहुत एरिया निकाला जा सकता है जो कुकी के होते संभव नहीं क्योंकि वे जंगल और पहाड़ की जमीन का डिस्ट्रक्शन किसी भी परियोजना आदि के लिए होने देंगे ।