20/06/2026
*मड़हा नदी के पुनर्जीवन की मुहिम: उद्गम स्थल ‘प्रमोदवन’ और मांडव्य ऋषि आश्रम को मिलेगी नई पहचान*
अयोध्या जनपद में लुप्तप्राय हो रही मड़हा नदी को बचाने और इसके गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने के लिए 'मिशन मड़हा-बिषुही नदी बचाओ अभियान' के तहत एक महत्वपूर्ण सर्वेक्षण और मुआयना किया गया। 18 जून 2026, बृहस्पतिवार को मणिप्राण संगठन के अध्यक्ष श्री मंशूभाई और तरुण सिंह गौड़ के नेतृत्व में टीम ने मवई ब्लॉक के लखनीपुर गाँव स्थित नदी के उद्गम स्थल का दौरा किया।
*पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व*
मड़हा नदी, जिसे तमसा, पुछारा और सुरसा नदी के नामों से भी जाना जाता है, का रामायण काल से गहरा संबंध है। मान्यताओं के अनुसार, इस नदी का उद्गम स्थल 'प्रमोदवन' है, जहाँ मांडव्य ऋषि का आश्रम स्थित था। वर्तमान में यह ऐतिहासिक स्थल मात्र 40 बीघा भूमि तक सिमट कर रह गया है। यह नदी न केवल एक जलस्रोत है, बल्कि अयोध्या के सांस्कृतिक और पौराणिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
*शासन-प्रशासन से उठाई गई मांग*
सर्वेक्षण के दौरान मणिप्राण संगठन के अध्यक्ष श्री मंशूभाई ने स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर के पुजारियों के साथ मिलकर शासन व प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि:
* विलुप्त हो रहे मांडव्य ऋषि आश्रम को सामाजिक पटल पर लाया जाए और इसका जीर्णोद्धार हो।
* मड़हा नदी के उद्गम स्थल के दोनों तटों पर घाट का निर्माण कराया जाए, ताकि इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सके।
नदी का प्रवाह मार्ग और भौगोलिक स्थिति
मड़हा नदी का प्रवाह मार्ग विस्तृत और कृषि प्रधान क्षेत्रों के लिए जीवनदायिनी है। यह लखनीपुर के मांडव्य ऋषि आश्रम से निकलकर बीबीपुर, खपरईया, हैलूपुर, बरौली, करौदी, पठान पुरवा और नरौली जैसे कई गाँवों से गुजरती है। आगे चलकर यह रुदौली, सोहावल, मसौधा, बीकापुर, तारुन, पूराबाजार, मया, गोसाईगंज और कटेहरी ब्लाक से होकर श्रवण क्षेत्र तक पहुँचती है, जहाँ बिषुही नदी से मिलकर यह 'तमसा' नदी का स्वरूप ले लेती है। इसके अतिरिक्त, राम सनेही घाट से महाराजा ताल के जल को भी इस नदी में समाहित किया गया है।
*कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति*
इस महत्वपूर्ण मुआयना कार्यक्रम में मंदिर के महंथ रामबृज सहित उमेश चन्द्र, राजित राम, राम कृर्षि, अंकुल, रामेश्वर, हरिराम, राधेश्याम समेत क्षेत्र के अनेक जागरूक नागरिक उपस्थित रहे। स्थानीय लोगों ने संगठन के इस प्रयास की सराहना करते हुए नदी के संरक्षण और सफाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
*इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नदी के प्रवाह को अवरुद्ध होने से बचाना और लुप्त होती ऐतिहासिक धरोहरों को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है।