10/06/2026
🖋️ एक जूनियर वकील की कहानी
सुबह 8 बजे...
काला कोट प्रेस करके उसने आईने में खुद को देखा। चेहरे पर आत्मविश्वास था, लेकिन जेब में बस ₹50 पड़े थे।
कोर्ट पहुँची तो सबसे पहले अपने सीनियर की फाइलें संभाली, तारीखें नोट कीं, कॉपी निकलवाई और पूरे दिन एक कोर्ट से दूसरी कोर्ट दौड़ती रही।
दोपहर हो गई...
कैंटीन से चाय की खुशबू आ रही थी, लेकिन उसने सिर्फ पानी पी लिया। सोचा, "शाम को घर जाकर खा लूँगी।"
फिर एक मुवक्किल आया और बोला—
"आप अभी जूनियर हैं? किसी बड़े वकील से मिलना है।"
वो मुस्कुरा दी...
क्योंकि उसे पता था कि आज का "जूनियर" ही कल किसी का भरोसेमंद वकील बनेगा।
शाम तक पैर दर्द कर रहे थे, लेकिन उसने फिर भी लाइब्रेरी में बैठकर केस लॉ पढ़ी।
कोई ताली नहीं बजा रहा था...
कोई सोशल मीडिया पोस्ट नहीं बन रही थी...
लेकिन उसका संघर्ष चुपचाप उसे मजबूत बना रहा था।
रात को घर लौटते समय उसने खुद से सिर्फ एक बात कही—
"आज मेहनत मेरी पहचान नहीं बनी है,
लेकिन एक दिन मेरी पहचान ही मेरी मेहनत की कहानी बताएगी।"
⚖️ हर सफल वकील के पीछे एक ऐसा दौर ज़रूर होता है जहाँ मेहनत ज़्यादा होती है और पहचान कम।
ऐसा करते करते कब प्रैक्टिस के 11 साल निकल गए जूनियर से कब सीनियर बन गए पता ही नहीं चला!
प्रैक्टिस ही इंसान को परफेक्ट अधिवक्ता बनाती है।
एडवोकेट अंकिता जायसवाल
जिला एवं सत्र न्यायालय।