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27/07/2026
⚖️ BCI सोशल मीडिया दिशानिर्देश: हर अधिवक्ता के लिए जानना ज़रूरी!सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना गलत नहीं है, लेकिन एक अधिवक्त...
22/07/2026

⚖️ BCI सोशल मीडिया दिशानिर्देश: हर अधिवक्ता के लिए जानना ज़रूरी!

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना गलत नहीं है, लेकिन एक अधिवक्ता के रूप में आपकी ऑनलाइन गतिविधियाँ भी पेशेवर आचरण (Professional Ethics) के दायरे में आती हैं।

इस पोस्ट में जानिए BCI के अनुसार वे बातें जिन्हें हर Advocate को सोशल मीडिया पर नहीं करना चाहिए।

📌 अपनी साथी अधिवक्ताओं के साथ यह पोस्ट ज़रूर शेयर करें।

⚠️ Disclaimer: यह पोस्ट केवल शैक्षणिक एवं कानूनी जागरूकता (Educational & Awareness) के उद्देश्य से बनाई गई है।

🏠 क्या मकान मालिक आपको जबरन घर से निकाल सकता है?❌ नहीं! कानून आपके अधिकारों की रक्षा करता है।यदि आप किरायेदार हैं और मका...
06/07/2026

🏠 क्या मकान मालिक आपको जबरन घर से निकाल सकता है?
❌ नहीं! कानून आपके अधिकारों की रक्षा करता है।

यदि आप किरायेदार हैं और मकान मालिक आपको बिना कानूनी प्रक्रिया के बेदखल करने की कोशिश कर रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। अपने अधिकार जानें और सही कानूनी सलाह लें।

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अपने अधिकार जानिए, सही कानूनी कदम उठाइए।

🏛️ “शादी हो जाने से बेटी परिवार से अलग नहीं हो जाती” – सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि ...
07/06/2026

🏛️ “शादी हो जाने से बेटी परिवार से अलग नहीं हो जाती” – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि केवल विवाहित (Married) होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) या आश्रित कोटे (Dependent Quota) के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

⚖️ मामला : Kulsum Nisha v. State of U.P.

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी बेटी की वैवाहिक स्थिति (Marital Status) उसके आश्रित होने, आर्थिक आवश्यकता या परिवार के प्रति जिम्मेदारियों का निर्धारण नहीं करती।

✅ विवाह के बाद भी बेटी अपने माता-पिता के परिवार का हिस्सा बनी रहती है।

✅ यह मान लेना कि शादी के बाद बेटी का अपने मायके से कोई संबंध नहीं रहता, संविधान के समानता सिद्धांत के विपरीत है।

✅ यदि विवाहित पुत्र को लाभ से वंचित नहीं किया जाता, तो विवाहित पुत्री को बाहर रखना लैंगिक भेदभाव (Gender Discrimination) है।

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⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायालय ने कहा कि आश्रित कोटे का उद्देश्य मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इसलिए मुख्य आधार—

• आर्थिक निर्भरता (Dependency)
• वित्तीय आवश्यकता (Financial Need)
• स्थानीय निवास (Residence)
• जिम्मेदारियों को निभाने की क्षमता

होना चाहिए, न कि वैवाहिक स्थिति।

📌 महत्वपूर्ण फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के विपरीत दृष्टिकोण को अस्वीकार करते हुए कहा कि विवाहित बेटी को परिवार की परिभाषा से बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 15(1) के विपरीत है।

अब विवाहित बेटी भी अन्य पात्रता शर्तें पूरी करने पर अनुकंपा नियुक्ति एवं आश्रित कोटे के लाभ की हकदार होगी।

⚖️ Affidavit और Notary में क्या अंतर है?अक्सर लोग Affidavit (शपथ पत्र) और Notary (नोटरी) को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोन...
07/06/2026

⚖️ Affidavit और Notary में क्या अंतर है?
अक्सर लोग Affidavit (शपथ पत्र) और Notary (नोटरी) को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग हैं।
📄 Affidavit (शपथ पत्र)
यह एक कानूनी दस्तावेज़ होता है, जिसमें कोई व्यक्ति शपथपूर्वक किसी तथ्य या जानकारी को सत्य घोषित करता है।
👨‍⚖️ Notary (नोटरी)
यह सरकार द्वारा नियुक्त एक अधिकृत अधिकारी होता है, जो दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति की पहचान सत्यापित करता है तथा दस्तावेज़ को प्रमाणित (Attest) करता है।
✅ आसान शब्दों में समझें:
• Affidavit = दस्तावेज़
• Notary = दस्तावेज़ को प्रमाणित करने वाला अधिकारी
📌 उदाहरण:
नाम परिवर्तन, जन्मतिथि सुधार, पता प्रमाण, आय संबंधी घोषणा आदि के लिए Affidavit तैयार किया जाता है, जिसे आवश्यकता अनुसार Notary या अन्य अधिकृत अधिकारी द्वारा सत्यापित किया जा सकता है।
💡 महत्वपूर्ण:
हर Affidavit के लिए Notary अनिवार्य नहीं होती। इसकी आवश्यकता संबंधित कानून, न्यायालय या विभाग के नियमों पर निर्भर करती है।

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