23/12/2023
*अमृतकण – १७*
“सैकड़ो वर्षों तक लहरों पर लहरे प्रत्येक वस्तु को तोड़ती फोड़ती हुई इस देश को आप्लवित करती रही है, लगातार चली है और ‘‘अल्लाहो अकबर’’ के गगन भेदी नारे लगे हैं, किन्तु वे बाढ़ें चली गयी और राष्ट्रीय आदर्शों में परिवर्तन न कर सकी। हजारों वर्षों के असंख्य कष्ट और संघर्षों में यह हिन्दू जाति मर क्यों न गई। यदि हमारे आचार विचार इतने खराब हैं तो क्यों हम लोग अब तक पृथ्वी पर से मिट न गये? क्या भिन्न-भिन्न वैदेशिक विजेताओं ने हमें कुचल डालने में किसी बात की कमी रखी? तब क्यों न हिन्दू अन्य देशों की भांति समूल नष्ट हो गये? भारतीय राष्ट्र मर नहीं सकता। अमर है वह और उस वक्त तक अमर रहेगा जब तक कि यह विचारधारा पृष्ठभूमि के रूप में रहेगी, जब तक कि इसके लोग आध्यात्मिकता को नहीं छोड़ेंगे।”
- *स्वामी विवेकानन्द*