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18/03/2026

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से पूछा कि मृत व्यक्तियों के बैंक खातों की जानकारी उनके वारिसों को क्यों नहीं दी जा सकती, ताकि वे उन खातों में जमा बिना दावे वाली रकम (Unclaimed Funds) को हासिल कर सकें।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच 2022 में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका वित्तीय पत्रकार और 'मनी लाइफ' की मैनेजिंग एडिटर सुचेता दलाल ने दायर की थी। इस याचिका का विषय निवेशकों और जमाकर्ताओं की वह बिना दावे वाली रकम थी, जिस तक उनके असली कानूनी वारिसों की पहुंच नहीं है।

दलाल की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक बड़ी समस्या तब खड़ी होती है, जब मृत व्यक्ति के वारिसों को यह पता ही नहीं होता कि उनके कितने खाते या फंड बिना दावे के रह गए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस PIL के ज़रिए यह निर्देश देने की मांग की गई कि ऐसे बिना दावे वाले खातों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।

इस पर जस्टिस मेहता ने बीच में टोकते हुए पूछा कि अगर ऐसे बिना दावे वाले फंड या खातों की जानकारी सार्वजनिक कर दी गई तो इससे ऑनलाइन जालसाज़ और धोखेबाज़ सक्रिय हो सकते हैं। वे खुद को वारिस बताकर उस रकम पर दावा कर सकते हैं।

भूषण ने इसका जवाब देते हुए कहा कि RBI ने भी एक 'केंद्रीयकृत और खोजने योग्य डेटाबेस' (Centralised & Searchable Database) बनाने की ज़रूरत बताई थी, जिसकी मदद से लोग अपने मृत माता-पिता के खातों का पता लगा सकें। भूषण ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता सिर्फ़ बैंकों के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य प्रतिभूतियों (Securities), बीमा और डाकघर खातों के लिए भी ऐसे केंद्रीयकृत डेटाबेस की माँग कर रहा है।

भूषण ने यह भी बताया कि कई तरह के कल्याणकारी फंड (Welfare Funds) की रकम भी इन्हीं बिना दावे वाले खातों में जमा हो गई। बिना दावे वाली यह कुल रकम 'बहुत बड़ी' है और एक लाख पचास हज़ार करोड़ रुपये से भी ज़्यादा है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने बेंच को 'जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता फंड' (Depositor Education and Awareness Fund) के बारे में जानकारी दी। इस फंड में उन अकाउंट्स की रकम जमा कर दी जाती है, जो 10 साल से बिना दावे के पड़े होते हैं। इस रकम का इस्तेमाल जन-जागरूकता और वित्तीय साक्षरता से जुड़ी योजनाओं क

09/11/2024
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01/01/2024

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दिनाँक 2 दिसम्बर 2023 को आगरा जनपद न्यायालय में चल रहे विवाह-विच्छेद के मामले को गौतमबुद्ध नगर जनपद न्यायालय में माननीय ...
23/12/2023

दिनाँक 2 दिसम्बर 2023 को आगरा जनपद न्यायालय में चल रहे विवाह-विच्छेद के मामले को गौतमबुद्ध नगर जनपद न्यायालय में माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद स्थानांतरित करवाया गया।

माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद से तहसीलदार न्यायालय सोरांव, प्रयागराज में लंबित दाखिल खारिज (नामांतरण/म्यूटेशन) वाद  के श...
02/12/2023

माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद से तहसीलदार न्यायालय सोरांव, प्रयागराज में लंबित दाखिल खारिज (नामांतरण/म्यूटेशन) वाद के शीघ्र निस्तारण हेतु दिनाँक 28/11/2023 को आदेश करवाया गया।

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06/10/2023

माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद से फैमिली कोर्ट इलाहाबाद में भरण पोषण हेतु लंबित याचिका के निस्तारण हेतु आदेश करवाया गया।

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