24/08/2026
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमीन विवाद से जुड़े करीब तीन दशक पुराने मामले में दीवानी न्यायाधीश को कथित तौर पर प्रभावित करने की कोशिश पर कड़ी नाराजगी जताई है। मामले में देवीपाटन मंडल की मंडलायुक्त खुद एक पक्ष हैं। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी पर इस तरह दबाव डालने की कोशिश न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला है और न्याय देने की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करती है।
हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने न्यायिक कार्यवाही से जुड़े मामलों में न्यायाधीशों को धमकाने या प्रभावित करने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि मामले में आपराधिक अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी ने निर्देश दिया कि मामले को उचित अदालत के समक्ष रखा जाए। इसके लिए पहले मुख्य न्यायाधीश या किसी वरिष्ठ न्यायाधीश से आवश्यक निर्देश प्राप्त किए जाएं।
अदालत की टिप्पणी में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायिक अधिकारियों को बाहरी दबाव से मुक्त रखने की जरूरत पर जोर दिया गया। हाई कोर्ट ने संकेत दिया कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
करीब तीन दशक पुराने जमीन विवाद में मंडलायुक्त के एक पक्ष होने और न्यायिक अधिकारी को कथित तौर पर प्रभावित करने की कोशिश के आरोपों के चलते मामला अब आपराधिक अवमानना की संभावित कार्रवाई के लिए आगे बढ़ सकता है।
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