03/06/2026
सरकारी अफसरों का सबसे बड़ा 'लूपहोल' खत्म! 🚨
अक्सर सरकारी दफ्तरों में यह देखने को मिलता है कि सीनियर अधिकारी खुद सीधे पैसे नहीं लेते, बल्कि कहते हैं— "यह पैसा हमारे लिए नहीं, नीचे वाले स्टाफ या जूनियर के लिए है।" अगर आपको लगता था कि ऐसा कहकर वो कानून से बच जाएंगे, तो आप गलत हैं।
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में The State by Lokayukta Police v. Sri K. Rangayya & Anr. [SLP (Crl.) No. 5245/2025] के ऐतिहासिक मामले में कानून की स्थिति को बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है।
न्यायालय ने निर्धारित किया है कि Prevention of Corruption Act, 1988 के तहत केवल स्वयं के लिए आर्थिक लाभ प्राप्त करना ही अपराध नहीं है। यदि कोई लोक सेवक (Public Servant) अपने अधीनस्थों (Subordinates) या किसी अन्य व्यक्ति के लिए भी अवैध परितोषण (Illegal Gratification) या रिश्वत की 'मांग' (Demand) करता है, तो वह कानून की नजर में उतना ही दोषी है।
सरल शब्दों में, भ्रष्टाचार के मामले में 'रिश्वत की मांग' (Demand) ही अपराध को पूर्ण बनाने के लिए पर्याप्त है, चाहे वह राशि किसी की भी जेब में जाए।
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