25/02/2025
नए आपराधिक कानून को सरकार ने बहुत ही सुव्यवस्थित तरीके से बनाया है जिसमे कुछ धाराएं नई जोड़ी गई तो कुछ धाराओ को हटाया भी गया है। भारतीय न्याय संहिता 2023 में महिलाओं से संबंधित अपराधों को एक ही जगह रखा गया एवं महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में सरकार ने काफी हद तक कड़ा रुख ही रखा है जो जरूरी भी है समाज मे महिलाओ के प्रति होने वाले अपराधों में अंकुश के लिए,,,,,, लेकिन ये तो बस एक पक्ष हुआ सब जानते है कि आज के समय में कुछ महिलाओं द्वारा उन्हें मिली कानूनी सहूलियत का गलत प्रयोग करती है।
सबसे खतरनाक कहे या इसमे विधायिका की मंशा को समझने का प्रयास करे तो धारा 69 BNS में काफी विरोधाभास है। मतलब महिला को ऐसे पेश किया गया इस धारा में की कोई भी उसको प्रलोभन देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बना सकता है अब अगर दिया गया प्रलोभन पूरा हो जाता है तो अपराध नही लेकिन अगर पूरा न हुआ तो अपराध🤔
धारा 69 BNS- *Sexual in*******se by employing deceitful means, etc.* मतलब इसमे शादी का, प्रमोशन का, नौकरी का, आदि कोई भी वादा किया गया तो वो प्रवंचनापूर्ण माना जायेगा।
दरासल अभी फिलहाल में एक केस आया जिसमे अभियुक्त जो पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल हैं के ऊपर आरोप था कि इसने शादी का वादा करके लगभग 10 माह से लगातार शारीरिक संबंध बनाता रहा और बाद अपना ट्रांसफर दूसरी जगह कराकर फोन उठाना बन्द कर दिया, जिससे अभियुक्त के ऊपर 69 BNS का आरोप लगा जिसमे 10 वर्ष तक सजा का प्रावधान है, फिर अभियुक्त जिस विभाग का कर्मचारी है वही विभाग उसको जेल भेजने के लिए ढूढ़ने लगा लेकिन सही समय मे भगवान ने उसका साथ दिया और वो *डिवाइन लॉ फर्म* में आ गया,
डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के सीनियर अधिवक्ता के माध्यम से फिर क्या डिवाइन लॉ फर्म के अधिवक्ता अभिषेक नारायण द्विवेदी जी तुरंत माननीय उच्च न्यायालय में उसकी रिट याचिका दायर की और एक सप्ताह के अंदर उसे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा स्टेय आदेश दिया गया जिससे जेल जाने से बचत हुई और आगे की बहस के लिए विपक्षी के वकील को जवाब दाखिल का आदेश दिया गया।
अभिषेक नारायण द्विवेदी, उच्च न्यायालय इलाहाबद।