Legal awareness by Anand Gaurav

Legal awareness by Anand Gaurav Pursued your neighbour for compromise ����� Lawyer with law firm ever pursued for compromise

जोधपुर।राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार व्यक्तियों को थाने के बाहर बैठाकर उनके फोटो खींचने, उन्हें मीडिया व सो...
21/01/2026

जोधपुर।राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार व्यक्तियों को थाने के बाहर बैठाकर उनके फोटो खींचने, उन्हें मीडिया व सोशल मीडिया में प्रसारित करने और कथित रूप से अपमानजनक परिस्थितियों में प्रस्तुत करने के खिलाफ सख्त रूख अपनाते हुए स्वप्रेणा प्रसंज्ञान लिया हैं.

जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने आरोपी को अपराधी की तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करने को न केवल असंवैधानिक बताया, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन और गरिमा के अधिकार का सीधा उल्लंघन करार दिया है।

अंतरिम आदेश के तहत, पुलिस द्वारा अपलोड की गई गिरफ्तार व्यक्तियों की सभी तस्वीरें और संबंधित सामग्री को सोशल मीडिया, वेब पोर्टल्स व अन्य प्लेटफॉर्म्स से तत्काल हटाने का आदेश दिया हैं.

इसके साथ ही एकलपीठ ने हाल ही में एक वरिष्ठ अधिवक्ता को थाने में बैठाकर फोटो वायरल करने के मामले में स्वप्रेणा प्रसंज्ञान लेते हुए

जोधपुर पुलिस आयुक्त को एक अधिवक्ता की वायरल तस्वीरें 24 घंटे के भीतर हटाने और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश।

मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक को शपथपत्र दाखिल कर आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने का आदेश दिया ह

✍️क्या हो रहा है संगम मे..? पाखंडियो का सम्मान है.. संगम मे जाकर भी लग्ज़रियस लाइफ को नहीं त्याग सकने वाले के लिए DM रोटी...
18/01/2026

✍️क्या हो रहा है संगम मे..?
पाखंडियो का सम्मान है.. संगम मे जाकर भी लग्ज़रियस लाइफ को नहीं त्याग सकने वाले के लिए DM रोटी सेंक रहे हैं..पोर्शे और डिफेंडर संगम तीरे जा सकतें हैं.. ई रिक्शा पूल नहीं पार कर सकता....अभी सूचना मिलि है कि पूज्य श्री शंकराचार्य जी के शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया..हिजड़ो का महिमा मंडन और परम् पूज्य श्री शंकराचार्य भगवान् का अपमान..?? माननीय ज्योतिराधिपति शंकराचार्य भगवान मान अपमान से पड़े है परंतु ये राक्षसी व्यवहार वो भी सनातनधर्म के सर्वोच्च पद के साथ ये समस्त सनातन धर्म का अपमान है। डंडी सन्यासी, गौ रक्षक को मारे हो, याद रखना धर्म सम्राट करपात्री जी महराज ने ९० के दशक में ऐसा करने वाले का समूचे परिवार सहित विनाश कर दिया था अपने क्रोध से अब अपनी बारी का इंतजार करो ........
ये अक्षम्य है..😑😡😡
#जगतगुरु
#ज्योर्तिमठ
#सनातनधर्म




Today’s picture from the swearing-in ceremony of the Chief Justice of the Calcutta High Court. Wonder why they still dre...
17/01/2026

Today’s picture from the swearing-in ceremony of the Chief Justice of the Calcutta High Court. Wonder why they still dress like that.

11/01/2026
07/01/2026

will is sufficient for mutataion honorable supreme court india
वसीयत (Will) के आधार पर Mutation (नामांतरण) से इनकार — गैरकानूनी है।

लंबे समय तक व्यवहार में यह देखने को मिला कि तहसील और SDM कार्यालयों में यह कहा जाता रहा कि “Will के आधार पर नामांतरण नहीं होगा, पहले सिविल कोर्ट से आदेश लाओ”। इस विषय पर अब Supreme Court of India ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। Jitendra Singh v. State of Madhya Pradesh (निर्णय दिनांक 06.07.2021) में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वसीयत के आधार पर Mutation करने पर कोई कानूनी रोक नहीं है और केवल इस कारण से कि दावा वसीयत पर आधारित है, नामांतरण से इनकार करना अवैध है। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि Mutation केवल राजस्व रिकॉर्ड से संबंधित प्रक्रिया है, इससे मालिकाना हक (Title) तय नहीं होता और राजस्व अधिकारी सिविल कोर्ट की तरह निर्णय नहीं कर सकते।
राजस्थान में यह सिद्धांत Rajasthan Land Revenue Act, 1956 की धारा 136 के अंतर्गत लागू होता है, जबकि वसीयत की वैधता Indian Succession Act, 1925 की धारा 63 से आती है। यदि किसी व्यक्ति को Will पर आपत्ति है, तो उसके लिए सिविल कोर्ट का उपाय उपलब्ध है, लेकिन तहसील स्तर पर नामांतरण रोका जाना कानूनन उचित नहीं है।









03/01/2026

Supreme Court of India के 20 महत्वपूर्ण (Landmark) फैसले जो नागरिक / संपत्ति कानून (Civil & Property Matters) से जुड़े हुए, जहाँ सामान्य जन-मान्यता कुछ और थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कानून को अलग तरह से स्पष्ट किया।

1. शाह बानो मामला (1985)

मोहम्मद अहमद खान बनाम शाह बानो बेगम
सामान्य धारणा: तलाक के बाद मुस्लिम महिला को भरण-पोषण नहीं मिलता।
फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण मिलेगा।

2. अयोध्या भूमि (2019)

एम. सिद्धिक बनाम महंत सुरेश दास
धारणा: आस्था से ही जमीन का फैसला होगा।
फैसला: जमीन का मालिकाना हक सबूतों से तय होगा, आस्था से नहीं।

3. बेटी का पैतृक संपत्ति में अधिकार (2020)

विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा
धारणा: बेटी को 2005 के बाद ही अधिकार मिलेगा।
फैसला: बेटी को जन्म से समान अधिकार है, पिता जीवित हो या नहीं।

4. GPA से संपत्ति खरीद (2011)

सूरज लैम्प बनाम हरियाणा राज्य
धारणा: GPA/एग्रीमेंट से मालिक बन जाते हैं।
फैसला: केवल रजिस्टर्ड सेल डीड से ही मालिकाना हक मिलता है।

5. लिव-इन रिलेशनशिप (2015)

धन्नूलाल बनाम गणेशराम
धारणा: लिव-इन का कोई कानूनी अधिकार नहीं।
फैसला: लंबे समय का लिव-इन विवाह माना जा सकता है।

6. प्रतिकूल कब्जा (Adverse Possession)

हरियाणा राज्य बनाम मुकेश कुमार (2011)
धारणा: लंबे समय से कब्जा = मालिकाना हक।
फैसला: अवैध कब्जेदार को आसानी से मालिक नहीं बनाया जा सकता।

7. मौखिक बंटवारा (2016)

एस. कलादेवी बनाम वी. आर. सोमसुंदरम
धारणा: बिना रजिस्ट्रेशन बंटवारा अमान्य।
फैसला: मौखिक बंटवारा वैध हो सकता है यदि सबूत हों

8. वसीयत बनाम कानूनी वारिस

जसवंत कौर बनाम अमृत कौर
धारणा: संपत्ति अपने-आप वारिसों को जाती है।
फैसला: वैध वसीयत, प्राकृतिक उत्तराधिकार पर भारी होगी।

9. बेनामी लेन-देन

बिनापानी पॉल बनाम प्रतिमा घोष
धारणा: पैसा देने वाला मालिक होता है।
फैसला: जिसके नाम रजिस्ट्रेशन है वही मालिक माना जाएगा।

10. मंदिर संपत्ति

शिरूर मठ मामला (1954)
धारणा: मंदिर की संपत्ति पुजारी की होती है।
फैसला: मंदिर की संपत्ति सार्वजनिक ट्रस्ट की होती है।

11. महिला का निवास अधिकार

सतीश चंदर आहूजा बनाम स्नेहा आहूजा (2020)
धारणा: पत्नी ससुराल की संपत्ति में नहीं रह सकती।
फैसला: महिला को वैवाहिक घर में रहने का अधिकार है

ससुराल में यौन उत्पीड़न भी दहेज उत्पीड़ना के दायरे में:-दिल्ली हाईकोर्टदिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया ह...
29/12/2025

ससुराल में यौन उत्पीड़न भी दहेज उत्पीड़ना के दायरे में:-दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि ससुराल पक्ष द्वारा महिला के साथ यौन उत्पीड़न किया जाता है, तो उसे केवल अलग अपराध मानकर नहीं देखा जाएगा, बल्कि वह दहेज उत्पीड़न की श्रेणी में भी आएगा। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अलग से सुनवाई की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह आचरण महिला के प्रति की गई शारीरिक और मानसिक क्रूरता का ही हिस्सा है।

कोर्ट के अनुसार, दहेज के लिए प्रताड़ना केवल पैसों या सामान की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला की गरिमा और शारीरिक स्वतंत्रता को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य भी उसी श्रेणी में आते हैं। इस फैसले का उद्देश्य कानून की व्यापक और वास्तविक व्याख्या करना है, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और अपराध की गंभीरता को कम करके न आंका जाए।

हालांकि, कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और ठोस साक्ष्य बेहद जरूरी हैं, ताकि कानून का दुरुपयोग न हो और निर्दोष व्यक्तियों को झूठे आरोपों का सामना न करना पड़े। न्याय तभी संतुलित होगा, जब पीड़ित को संरक्षण और आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई—दोनों समान रूप से मिलें।

BJP MP Bhim Singh has introduced a Private Member’s Bill in the Rajya Sabha seeking removal of the words ‘secular’ and ‘...
07/12/2025

BJP MP Bhim Singh has introduced a Private Member’s Bill in the Rajya Sabha seeking removal of the words ‘secular’ and ‘socialist’ from the Preamble, calling their 1976 inclusion during the Emergency “undemocratic”. He says the original Constitution didn’t require these terms.

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