03/07/2026
आरोपी से मिली फीस पर वकील का बैंक अकाउंट फ्रीज? हाई कोर्ट ने कह दिया, ये गलत है!
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ किया कि किसी अभियुक्त द्वारा अपने वकील को दी गई पेशेवर फीस को केवल इसलिए 'अपराध की आय' नहीं माना जा सकता कि भुगतान करने वाला आरोपी है।
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने कानपुर के वकील आयुष वाजपेयी की याचिका पर यह टिप्पणी की, जिनका बैंक खाता साइबर सेल ने फर्जी लेनदेन बताकर फ्रीज कर दिया था — जबकि वो रकम असल में उनके मुवक्किल से मिली प्रोफेशनल फीस थी।
कोर्ट ने कहा — एक वकील बड़े घोटाले या धोखाधड़ी के आरोपी का भी बचाव कर सकता है, लेकिन जब तक वकील खुद किसी अपराध में शामिल न हो, उसकी फीस को अपराध की कमाई नहीं कहा जा सकता। फीस का स्रोत चाहे सरकार हो, आम नागरिक हो या आरोपी — वकील की पेशेवर आय और स्रोत में फर्क करना जरूरी है।
कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए अपर मुख्य सचिव (गृह) से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है कि पुलिस बैंक अकाउंट फ्रीज करने की शक्ति का ऐसा दुरुपयोग कैसे रोकेगी।
अगली सुनवाई 17 जुलाई को —