28/08/2025
भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) 2023 बीएनएस की धारा 38 की एक धारा है जो बताती है कि शरीर की निजी सुरक्षा का अधिकार कब मृत्यु कारित करने तक विस्तारित होता है. इसका मतलब है कि कुछ परिस्थितियों में, एक व्यक्ति अपनी जान या शरीर की रक्षा के लिए दूसरे व्यक्ति को मार भी सकता है, और यह कृत्य दंडनीय नहीं होगा.
मुख्य बातें
मृत्यु का उचित भय:
यह अधिकार तब लागू होता है जब किसी व्यक्ति को किसी हमले से अपनी मृत्यु का उचित भय हो.
गंभीर चोट का भय:
यदि हमले से व्यक्ति को ऐसी आशंका हो कि उसे या किसी अन्य व्यक्ति को गंभीर चोट पहुँचेगी, तो निजी बचाव का अधिकार भी मृत्यु तक विस्तारित हो सकता है.
अपमानजनक
कुछ खास तरह के कार्य, जैसे कि एसिड फेंकने या देने का कृत्य या उसका प्रयास, जिससे गंभीर चोट लगने की आशंका हो, इस धारा के तहत आ सकते हैं.
गिरफ्तारी की स्थिति:
यदि किसी व्यक्ति को गलत तरीके से बंदी बनाने के इरादे से ऐसा हमला किया जाता है कि वह अपनी रिहाई के लिए सार्वजनिक अधिकारियों से मदद नहीं ले पाता, तब भी निजी बचाव का अधिकार मृत्यु तक बढ़ सकता है.
उदाहरण
यदि कोई व्यक्ति किसी पर जानलेवा हमला करता है, तो हमला किए गए व्यक्ति को खुद को बचाने के लिए उस हमलावर को जान से मारने का अधिकार हो सकता है, यदि आत्मरक्षा में ऐसा न करने पर उसकी अपनी जान को खतरा हो.