Advocate Pradeep Kumar Singh

Advocate Pradeep Kumar Singh Hi, I'm [Pradeep Kumar Singh], a criminal law attorney with experience in high-conflict cases.

I have training in mediation and collaborative law and can help deal with emotionally charged situations.

भारतीय न्याय संहिता की कुछ महत्वपूर्ण धाराएं
08/18/2026

भारतीय न्याय संहिता की कुछ महत्वपूर्ण धाराएं

Happy independence day 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🎈🎂
08/14/2026

Happy independence day 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🎈🎂

08/05/2026
ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन  के लिए कुछ टॉपिक
08/04/2026

ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन के लिए कुछ टॉपिक

06/19/2026

राघव चड्ढा: दुनियां में वो पैसा नहीं बना और पार्टी नहीं बनी जो मुझे खरीद सके ?
सयानी घोष: मैं चड्ढा नहीं हूं , जो चड्ढी बन जाऊंगी , घोष हमेशा घोष हीं रहेगा !

Raghav Chadda भी बिक गए और Sayoni Ghosh भी चड्डी बन गई ...
लेकिन समर्थक आज भी लड़ रहे हैं! कल तक जो shayoni Ghosh को गालियां दे रहे थे अब दीदी बुला रहे हैं!

राजनीति एक खेल है जिसे चालाक लोग खेलते हैं और मूर्ख सिर्फ विवाद करते हैं

01/16/2026

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम निर्णय में हिंदू महिलाओं के अधिकारों को मजबूती दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला अपने ससुर के निधन के बाद विधवा होती है, तब भी वह उसकी संपत्ति से भरण-पोषण की मांग कर सकती है। न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा कि हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के तहत किसी महिला को ‘आश्रित’ मानने के लिए यह मायने नहीं रखता कि उसके पति की मृत्यु ससुर के निधन से पहले हुई या बाद में। पति की मृत्यु का समय इस अधिकार को प्रभावित नहीं करता, इसलिए ऐसी विधवा महिला को अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण पाने का पूरा हक हो

01/07/2026

उत्तर प्रदेश में एक दलित व्यक्ति अपनी जमीन किसी भी जाति के व्यक्ति (सामान्य या गैर-अनुसूचित जाति) को बेच सकता है, लेकिन इसके लिए जिलाधिकारी (DM) की पूर्व अनुमति (prior permission) लेना अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जमीन का हस्तांतरण आर्थिक दबाव या धोखाधड़ी में न हो और बेचने के बाद भी दलित व्यक्ति के पास न्यूनतम निर्धारित भूमि (लगभग 3.125 एकड़) बची रहे; यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के तहत नियंत्रित होती है.
मुख्य शर्तें और प्रक्रिया:
जिलाधिकारी की अनुमति: अनुसूचित जाति (SC) के भूमिधर को अपनी जमीन किसी गैर-SC व्यक्ति को बेचने, दान करने, गिरवी रखने या पट्टे पर देने से पहले जिलाधिकारी से लिखित अनुमति लेनी होती है.
भूमि का न्यूनतम हिस्सा: जिलाधिकारी यह देखता है कि बिक्री के बाद दलित व्यक्ति के पास कम से कम 1.26 हेक्टेयर (लगभग 3.125 एकड़) भूमि बची रहे.
अपवाद (Exceptions): कुछ विशेष परिस्थितियों में, अगर भूमिधारक के पास वारिस न हो, वह दूसरे राज्य में बस गया हो, या परिवार में कोई जानलेवा बीमारी हो, तो इन शर्तों में छूट मिल सकती है.
ऑनलाइन प्रक्रिया: अब यह अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया ऑनलाइन भी उपलब्ध है, जिससे समय-सीमा (लगभग 45 दिन) तय की गई है.
संक्षेप में, दलित अपनी जमीन किसी भी जाति को बेच सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया जिलाधिकारी की अनुमति और कानूनी प्रावधानों के तहत ही पूरी की जाती है, जिसका उद्देश्य SC समुदाय की जमीन की सुरक्षा करना है.

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