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प्रेस विज्ञप्ति / सार्वजनिक एडवाइजरीजनपद सुलतानपुर में डीजे (DJ) एवं ध्वनि विस्तारक यंत्रों के संचालन के संबंध में दिशा-...
22/09/2026

प्रेस विज्ञप्ति / सार्वजनिक एडवाइजरी

जनपद सुलतानपुर में डीजे (DJ) एवं ध्वनि विस्तारक यंत्रों के संचालन के संबंध में दिशा-निर्देश

माननीय उच्च न्यायालय एवं शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जनपद में शांति व्यवस्था, लोक सुरक्षा एवं आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डीजे संचालकों, आयोजकों एवं आमजन के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं—
1. ध्वनि सीमा (Decibel Limits)*--• ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन अनिवार्य है।
आवासीय क्षेत्रों में दिन में 55 एवं रात्रि में 45 डेसिबल से अधिक ध्वनि न हो तथा अत्यधिक तेज आवाज/बेस का प्रयोग न करें।
2. पूर्व अनुमति अनिवार्य---• सार्वजनिक कार्यक्रम, शादी-विवाह, जुलूस एवं त्योहारों में डीजे संचालन हेतु सक्षम अधिकारी से आवश्यक लिखित अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
*3. अश्लील एवं भड़काऊ गीतों पर रोक*--• अश्लील, जातिगत, आपत्तिजनक, द्वेष फैलाने वाले अथवा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले गानों का प्रयोग प्रतिबंधित है। उल्लंघन पर आयोजक एवं संचालक के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
4. शांत क्षेत्र (Silent Zone)--• अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, न्यायालयों एवं धार्मिक स्थलों के आसपास निर्धारित 100 मीटर क्षेत्र में डीजे एवं हॉर्न का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा।
5. डीजे का आकार एवं वाहन मानक---• डीजे साउंड सिस्टम एवं उपकरण वाहन की निर्धारित सीमा के भीतर हों तथा वाहन की बॉडी से बाहर न निकले हों। अत्यधिक ऊंचे टावर/बॉक्स एवं यातायात में बाधा उत्पन्न करने वाले सेटअप का प्रयोग न करें।
6. डीजे प्रतियोगिता पर पूर्ण प्रतिबंध--• जनपद में किसी भी प्रकार की डीजे प्रतियोगिता का आयोजन प्रतिबंधित रहेगा। अत्यधिक तेज आवाज में मुकाबला करने अथवा वाहनों को आमने-सामने खड़ा कर ध्वनि बढ़ाने पर आयोजकों एवं संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी धाराएं एवं परिणाम----उपरोक्त निर्देशों का उल्लंघन करने वाले डीजे संचालक, आयोजक अथवा अन्य व्यक्ति के विरुद्ध प्रचलित विधिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी—

ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के उल्लंघन पर नियमानुसार जुर्माना एवं ध्वनि उपकरणों की जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 270-292 के अंतर्गत सार्वजनिक उपद्रव संबंधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के अंतर्गत विधिवत जारी आदेश की अवहेलना पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 15 के अंतर्गत पर्यावरण संबंधी नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 एवं अन्य सुसंगत प्रावधानों के तहत अवैध/असुरक्षित डीजे सेटअप एवं वाहन के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
नियमों के उल्लंघन पर संबंधित डीजे सेटअप, साउंड सिस्टम एवं वाहन को नियमानुसार जब्त किया जा सकता है।

आगामी त्योहारों के दृष्टिगत डीजे संचालकों एवं आमजन से निम्नलिखित अपील की जाती है—

1. डीजे एवं ध्वनि विस्तारक यंत्रों का संचालन निर्धारित ध्वनि सीमा एवं शासन के निर्देशों के अनुरूप करें।
2. आवाज इतनी तेज न रखें, जिससे बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों एवं विद्यार्थियों को असुविधा हो।
3. धार्मिक आयोजनों एवं जुलूसों में अश्लील, आपत्तिजनक अथवा भड़काऊ गानों का प्रयोग न करें।
4. यातायात व्यवस्था एवं आमजन की सुविधा का ध्यान रखें तथा सड़क मार्ग को अनावश्यक रूप से अवरुद्ध न करें।
5. अफवाह, विवाद एवं कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों से बचें तथा पुलिस प्रशासन का सहयोग करें।
6. नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।

आपसी सौहार्द बनाए रखें, शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित त्योहार मनाएं।

21 सितम्बर 2026 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने जसकरन जीत सिंह देओल बनाम पंजाब राज्य (Jaskaran Jeet Singh Deol Vs. State of ...
22/09/2026

21 सितम्बर 2026 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने जसकरन जीत सिंह देओल बनाम पंजाब राज्य (Jaskaran Jeet Singh Deol Vs. State of Punjab) मामले में एक ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होने वाला फैसला सुनाया है। जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस फैसले में नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं।
इस ऐतिहासिक फैसले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन होने पर तत्काल रिहाई
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 22(1) सर्वोपरि (Sacrosanct) है। यदि किसी गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के लिखित आधार (Grounds of Arrest) नहीं बताए जाते हैं या उसे अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने की अनुमति नहीं दी जाती है, तो यह गिरफ्तारी पूरी तरह असंवैधानिक मानी जाएगी। ऐसी स्थिति में आरोपी तत्काल रिहाई का हकदार होगा।
2. मनमानी पुन: गिरफ्तारी (Re-arrest) पर रोक
अदालत ने एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा तय करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अनुच्छेद 22(1) के उल्लंघन के कारण रिहा किया जाता है, तो पुलिस या वही अथॉरिटी अपनी मर्जी से उसे दोबारा गिरफ्तार नहीं कर सकती।
* दोबारा गिरफ्तारी के लिए अब मजिस्ट्रेट की मंजूरी/अनुमति अनिवार्य होगी। [3]
* मजिस्ट्रेट को भी यह देखना होगा कि क्या पुन: गिरफ्तारी के लिए कोई नए और ठोस आधार मौजूद हैं या नहीं।

3. दोषी पुलिस अधिकारियों पर विभागीय जांच (Departmental Enquiry)
कोर्ट ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जो पुलिस अधिकारी बिना लिखित आधार सौंपे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते हैं, उन्हें विभागीय जांच और कड़े अनुशासनात्मक एक्शन का सामना करना पड़ेगा। संविधान का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, चाहे अपराध कितना ही गंभीर क्यों न हो।
4. मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला शिरोमणि अकाली दल के नेता जसकरन सिंह देओल की अपील से जुड़ा था, जिन्हें मई 2026 में पंजाब पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। प्रक्रियात्मक खामियों और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पुराने आदेश को खारिज कर यह बड़ा फैसला सुनाया।

20/09/2026
आम ग्राहकों (Consumers) के लिए UPI पेमेंट पर कोई भी पैसा डिडक्ट (कट) नहीं होगा। आपके लिए UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह से मुफ...
16/09/2026

आम ग्राहकों (Consumers) के लिए UPI पेमेंट पर कोई भी पैसा डिडक्ट (कट) नहीं होगा। आपके लिए UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह से मुफ़्त है।
हाल ही में (सितंबर 2026) सरकार और NPCI द्वारा जारी किए गए नए नियमों को लेकर सोशल मीडिया पर काफी भ्रम फैला हुआ है। इसकी सही जानकारी नीचे दी गई है:
——————————
# # 📌 नए नियमों का असली सच

*
* पर्सन-टू-पर्सन (P2P): अगर आप अपने किसी दोस्त, परिवार के सदस्य या किसी भी व्यक्ति के बैंक खाते में पैसे भेजते हैं, तो वह पूरी तरह से फ्री रहेगा, चाहे रकम कितनी भी हो।
* छोटे दुकानदार (Small Merchants): अगर आप किसी छोटी दुकान, रेहड़ी-पटरी या ऑटो वाले को QR कोड स्कैन करके पेमेंट करते हैं, तो कोई चार्ज नहीं कटेगा। [6, 7]
* ₹2,000 से कम के मर्चेंट पेमेंट: किसी भी दुकान या बिज़नेस को ₹2,000 तक की पेमेंट करने पर कोई चार्ज नहीं है।
* ₹2,000 से अधिक के बड़े पेमेंट: अगर आप किसी बड़े मॉल, ई-कॉमर्स वेबसाइट या बड़े मर्चेंट को ₹2,000 से ज़्यादा का पेमेंट करते हैं, तो 15 अक्टूबर 2026 से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा।
*

⚠️ सबसे ज़रूरी बात: यह MDR चार्ज सिर्फ दुकानदारों/व्यापारियों (Merchants) को देना होगा, ग्राहकों को नहीं। सरकार ने साफ़ निर्देश दिए हैं कि बैंक या मर्चेंट इस चार्ज का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। उदाहरण के लिए, अगर आप ₹3,000 का सामान खरीदते हैं, तो आपके बैंक खाते से सिर्फ ₹3,000 ही कटेंगे।

अधिवक्ता सुशील कुमार तिवारी “विवेक”

दीवानी नयायालय सुल्तानपुर

उच्च न्यायालय लखनऊ

6394947812,9415156039

योगी जी को बहुत बहुत धन्यवाद Yogi Adityanath High Court Lucknow
16/09/2026

योगी जी को बहुत बहुत धन्यवाद
Yogi Adityanath
High Court Lucknow

योगी जी को बहुत बहुत धन्यवाद High Court Lucknow
16/09/2026

योगी जी को बहुत बहुत धन्यवाद High Court Lucknow

16/09/2026
अधिवक्ता द्वय
16/09/2026

अधिवक्ता द्वय

⚖️ कानूनी जानकारी – आपके मौलिक अधिकार और पुलिस प्रक्रिया!कानून जानना हर नागरिक का अधिकार है। भारत का संविधान और कानूनी प...
23/08/2026

⚖️ कानूनी जानकारी – आपके मौलिक अधिकार और पुलिस प्रक्रिया!
कानून जानना हर नागरिक का अधिकार है। भारत का संविधान और कानूनी प्रक्रियाएं आपको निष्पक्ष न्याय और सुरक्षा की गारंटी देती हैं:
गिरफ्तारी के नियम: केवल शक के आधार पर गिरफ्तारी नहीं हो सकती; ठोस कारण और उचित कानूनी आधार आवश्यक हैं।
कस्टडी में अधिकार: वकील से परामर्श करने और अपने परिजनों को सूचित करने का अधिकार।
दस्तावेज़ की सुरक्षा: किसी भी कागज़ पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे पढ़ने और समझने का पूरा अधिकार है।
महिलाओं की सुरक्षा: सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले महिला की गिरफ्तारी केवल विशेष परिस्थितियों में ही हो सकती है।
कानून से डरें नहीं, सतर्क रहें और अपने अधिकारों को जानें!
⚖️ कानूनी परामर्श एवं सहायता के लिए:
👨‍⚖️ अधिवक्ता सुशील कुमार तिवारी
📍 सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश
📞 संपर्क: +91 63949 47812 | +91 94151 56039

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