TAX ADVOCATE VINAY AGARWAL

TAX ADVOCATE VINAY AGARWAL कर सलाहकार एवं कंप्यूटरज्ड एकाउंटिंग कार्य Tax Advocate With Expert In All Type Accounts Work

11/10/2022

*"हिजड़ों ने भाषण दिए लिंग-बोध पर,*
*वेश्याओं ने कविता पढ़ी आत्म-शोध पर"।*
*महिलाओं का दैहिक शोषण करने वाले नेता ने भाषण दिया नारी अस्मिता पर।*
*भ्रष्ट अधिकारियों ने शुचिता और पारदर्शिता पर उद्बोधन दिया विश्वविद्यालय मैं कभी ना पढ़ाने वाले प्रोफेसर कर्म योग पर व्याख्यान दे रहे हैं।*
असल मे दोष इनका नहीं है।
*इस देश की प्रजा प्रधानमंत्री को मंदिर में पूजा करते देखने की आदी नहीं है।*

*इस देश ने एडविना माउंटबेटन की कमर में हाथ डाल कर नाचते प्रधानमंत्री को देखा है।*

इस देश ने
*मजारों पर चादर चढ़ाते प्रधानमंत्री को देखा है।*
यह जनता *प्रधानमंत्री को*
*पार्टी अध्यक्ष के सामने नतमस्तक होते देखती आयी है। मंदिर में भगवान के समक्ष नतमस्तक प्रधानमंत्री को लोग कैसे सहन करें ?*

बिहार के *एक बिना अखबार के पत्रकार मंदिर से निकल कर सूर्य को प्रणाम करते प्रधानमंत्री का उपहास उड़ा रहे हैं।*

एक महान लेखक जिनका सबसे बड़ा प्रशंसक भी उनकी चार किताबों का नाम नहीं जानता,
*प्रधानमंत्री के भगवा चादर की आलोचना कर रहे हैं।*

एक कवियित्री जो अपनी कविता से अधिक मंच पर चढ़ने के पूर्व सवा घण्टे तक मेकप करने के लिए जानी जाती हैं, *प्रधानमंत्री के पहाड़ी परिधान की आलोचना कर रही हैं।*

भारत के इतिहास में आलोचना कभी इतनी निर्लज्ज नहीं रही, ना ही बुद्धिजीविता इतनी लज्जाहीन हुई कि
*गांधीवाद के स्वघोषित योद्धा भी*
*बंगाल की हिंसा के लिए ममता बनर्जी का समर्थन करें।*

क्या कोई व्यक्ति इतना हताश हो सकता है कि किसी की पूजा की आलोचना करे ?
*क्या इस देश का प्रधानमंत्री अपनी आस्था के अनुसार ईश्वर की आराधना भी नहीं कर सकता ?*
क्या बनाना चाहते हैं देश को आप ?
*सेक्युलरिज्म की यही परिभाषा गढ़ी है आपने ?*

एक हिन्दू नेता का टोपी पहनना उतना ही बड़ा ढोंग है, जितना किसी ईसाई का तिलक लगाना।
लेकिन जो लोग इस ढोंग को भी बर्दाश्त कर लेते हैं, उनसे भी
*प्रधानमंत्री की शिव आराधना बर्दाश्त नहीं हो रही।*

संविधान की प्रस्तावना में वर्णित
*"धर्म, आस्था और विश्वास की स्वतंत्रता" का*
*यही मूल्य है आपकी दृष्टि में ?*

व्यक्ति विरोध में अंधे हो चुके मूर्खों की यह टुकड़ी चाह कर भी नहीं समझ पा रही कि
*मोदी एक व्यक्ति भर हैं,*
*आज नहीं तो कल हार जाएगा*
*कल कोई और था,*
*कल कोई और आएगा।*
*देश न इंदिरा पर रुका था,*
*न मोदी पर रुकेगा।*

समय को इस बूढ़े से जो करवाना था वह करा चुका।
*मोदी ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी है।*
मोदी ने *ईसाई पति की पत्नी से*
*महाकाल मंदिर में रुद्राभिषेक करवाया है.*
मोदी ने *मिश्रित DNA वाले इसाई को हिन्दू बाना धारण करने के लिए मजबूर कर दिया है।*
मोदी ने *ब्राम्हणिक वैदिक के विरोध मे राजनीतिक यात्रा शुरू करनेवाले से शिवार्चन करवाया है। मोदी ने रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले के पुत्र से राममंदिर का चक्कर लगवाया है।*
*हिन्दुओं में हिन्दुत्व की चेतना जगानेवाले*

*मोदी के बाद*
*अब वही आएगा*
जो *मोदी से भी बड़ा मोदी होगा।*

*"मोदी नाम केवलम"* का
जाप करने वाले *मूर्ख जन्मान्ध विरोधियों, अब मोदी आये न आये, तुम्हारे दिन कभी नहीं आएंगें।*

_*अब ऐसी कोई सरकार नहीं आएगी जो घर बैठा कर मलीदा खिलाये!*_
💐💐 *भारत बदल चुका है।* 💐💐

*🚩सनातन की चेतना जाग चुकी है।* 💫
🚩🚩🚩🚩🚩
कृपया अपने पांच मित्रों से शेयर अवश्य करें धन्यवाद।जय सनातन। जय श्री कृष्ण।

11/10/2022
*🙏🙏🙏हमारी संस्कृति के वैज्ञानिक तथ्य 🙏🙏🙏*चप्पल बाहर क्यों उतारते हैं ?*मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नि...
01/10/2022

*🙏🙏🙏हमारी संस्कृति के वैज्ञानिक तथ्य 🙏🙏🙏

*चप्पल बाहर क्यों उतारते हैं ?*
मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नियम दुनिया के हर मंदिर में है..।
इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मंदिर की फर्शों का निर्माण पुराने समय से अब तक इस प्रकार किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है..।

*दीपक के ऊपर हाथ घुमाने का वैज्ञानिक कारण*
आरती के बाद सभी लोग दिए पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है..।

*मंदिर में घंटा लगाने का कारण*
जब भी मंदिर में प्रवेश किया जाता है तो दरवाजे पर घंटा टंगा होता है जिसे बजाना होता है। मुख्य मंदिर (जहां भगवान की मूर्ति होती है) में भी प्रवेश करते समय घंटा या घंटी बजानी होती है, इसके पीछे कारण यह है कि इसे बजाने से निकलने वाली आवाज से सात सेकंड तक गूंज बनी रहती है जो शरीर के सात हीलिंग सेंटर्स को सक्रिय कर देती है..।

*भगवान की मूर्ति*
मंदिर में भगवान की मूर्ति को गर्भ गृह के बिल्कुल बीच में रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस जगह पर सबसे अधिक ऊर्जा होती है जहां सकारात्मक सोच से खड़े होने पर शरीर में सकारात्मक ऊर्जा पहुंचती है और नकारात्मकता दूर भाग जाती है।

*परिक्रमा करने के पीछे वैज्ञानिक कारण*
हर मुख्य मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करनी होती है। परिक्रमा 3,5,7 से बार करनी होती है। जब मंदिर में परिक्रमा की जाती है तो सारी सकारात्मक ऊर्जा, शरीर में प्रवेश कर जाती है और मन को शांति मिलती है..।

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30/09/2022
30/09/2022

*क्या नाचने गाने को विवाह कहते हैं, क्या दारू पीकर हुल्लड़ मचाने को विवाह कहते हैं, क्या रिश्तेदारों और दोस्तों को इकट्ठा करके दारु की पार्टी को विवाह कहते हैं ? डीजे बजाने को विवाह कहते हैं, नाचते हुए लोगों पर पैसा लुटाने को विवाह कहते हैं, घर में सात आठ दिन धूम मची रहे उसको विवाह कहते हैं? दारू की 20-25 पेटी लग जाए उसको विवाह कहते हैं ? किसको विवाह कहते हैं?*
*विवाह उसे कहते हैं जो बेदी के ऊपर मंडप के नीचे पंडित जी मंत्रोच्चारण के साथ देवताओं का आवाहन करके विवाह की वैदिक रस्मों को कराने को विवाह कहते हैं।*

*लोग कहते हैं कि हम आठ 8 महीने से विवाह की तैयारी कर रहे हैं और पंडित जी जब सुपारी मांगते हैं तो कहते हैं अरे वह तो भूल गए जो सबसे जरूरी काम था वह आप भूल गए विवाह की सामग्री भूल गए और वैसे तुम 10 महीने से विवाह की कोनसी तैयारी कर रहे हैं।*
*विवाह - नहीं साहब आप दिखावे की तैयारी कर रहे हो कर्जा ले लेकर दिखावा कर रहे हो हमारे ऋषियों ने कहा है जो जरूरी काम है वह करो । ठीक है अब तक लोगों की पार्टियां खाई है तो खिलानी भी पड़ेगी ठीक है समय के साथ रीति रिवाज बदल गए हैं मगर दिखावे से बचे।*
*मैं कहना चाहता हूं आज आप दिखावा करना चाहते हो करो खूब करो मगर जो असली काम है जिसे सही मायने में विवाह कहते हैं वह काम गौण ना हो जाऐ, 6 घंटे नाचने में लगा देंगे, 4 घंटे मेहमानो से मिलने में लगा देंगे', 3 घंटे जयमाला में लगा देंगे, 4 घंटे फोटो खींचने में लगा देंगे और पंडित जी के सामने आते ही कहेंगे पंडितजी जी जल्दी करो जल्दी करो , पंडित जी भी बेचारे क्या करें वह भी कहते है सब स्वाहा स्वाहा जब तुम खुद ही बर्बाद होना चाहते हो तो पूरी रात जगना पंडित जी के लिए जरूरी है क्या उन्हें भी अपना कोई दूसरा काम ढूंढना है उन्हें भी अपनी जीविका चलानी है, मतलब असली काम के लिए आपके पास समय नहीं है। मेरा कहना यह है कि आप अपने सभी नाते, रिश्तेदार, दोस्त ,भाई, बंधुओं को कहो कि आप जो यह फेरों का काम है वह किसी मंदिर, गौशाला, आश्रम या धार्मिक स्थल पर किसी पवित्र स्थान पर करें ।*
*जहां दारू पीगई हों जहां हड्डियां फेंकी गई हों क्या उस मैरिज हाउस उह पैलेस कंपलेक्स मैं देवता आएंगे, आशीर्वाद देने के लिए, आप हृदय से सोचिए क्या देवता वहां आपको आशीर्वाद देने आऐंगे, आपको नाचना कूदना, खाना-पीना जो भी करना है वह विवाह वाले दिन से पहले या बाद में करे मगर विवाह का कोई एक मुहूर्त का दिन निश्चित करके उस दिन सिर्फ और सिर्फ विवाह से संबंधित रीति रिवाज होने चाहिए , और यह शुभ कार्य किसी पवित्र स्थान पर करें। जिस मै गुरु जन आवें, घर के बड़े बुजुर्गों का जिसमें आशीर्वाद मिले ।*
*आप खुद विचार करिये हमारे घर में कोई मांगलिक कार्य है जिसमें सब आये और अपने ठाकुर को भूल जाऐं अपने भगवान को भूलजाऐं अपने कुल देवताओं को भूलजाये।*
*मेरा आपसे करबद्ध निवेदन है कि विवाह नामकरण अन्य जो धार्मिक उत्सव है वह शराब के साथ संपन्न ना हो उन में उन विषय वस्तुओं को शामिल ना करें जो धार्मिक कार्यों में निषेध है ।*

23/09/2022

" #मुस्लिम_वक्फ_बोर्ड Vs जिंदल ग्रुप and others केस"
बीते शुक्रवार को जिस दिन देश भर में मुस्लिमों द्वारा अलविदा नमाज पढ़ी जा रही थी... देश की सुप्रीम कोर्ट एक ऐसे अहम मामले में फैसला सुना रहा था.. जो कि, आगामी समय में देश की दशा और दिशा बदल सकता है!वो केस था... "मुस्लिम वक्फ बोर्ड बनाम जिंदल ग्रुप केस"
ये केस कुछ इस तरह का था कि... राजस्थान सरकार ने 2010 में जिंदल ग्रुप ऑफ कम्पनीज को एक जमीन माइनिंग के लिए अलॉट की ।उस जमीन के एक भाग पर एक छोटा सा चबूतरा और उससे लगा एक दीवार बना हुआ था। इसी ग्राउंड पर #वक्फ_बोर्ड ने इस जमीन पर दावा किया परंतु सुप्रीम कोर्ट ने उसके इस दावे की हवा निकाल कर एक माईल स्टोन जजमेंट दे दिया लेकिन, इस घटना को ठीक से समझने के लिए पहले हमें नियम कानून को ठीक से जानने की आवश्यकता है.
असल में नियम यह है कि जब कोई जमीन / प्रोपर्टी किसी से खरीदी या बेची जाती है तो उस जमीन का सर्वे होता है जो कि कोई सरकारी अमीन या तहसीलदार करते हैं..
उसके बाद उस जमीन के बारे में आपत्ति मांगी जाती है.
अगर कहीं से कोई आपत्ति नहीं आई तो फिर उस जमीन का नए मालिक के नाम पर दाखिल खारिज कर दिया जाता है.
इस... #वक्फ के मामले में भी कुछ ऐसा ही है.
वक्फ Act 1965 और 1995 के अनुसार... अगर वक्फ बोर्ड किसी जमीन पर अपना दावा करता है तो वक्फ के सर्वेयर उस जमीन पर जाकर उसका सर्वे करते हैं और अगर उन्हें ऐसा लगा ( if they feel) कि ये वक्फ बोर्ड की जमीन है तो वे उसे अपने रिकॉर्ड में चढ़ा लेते हैं,लेकिन, अगर किसी को वक्फ बोर्ड के इस कृत्य पर आपत्ति हो तो वो "वक्फ ट्रिब्यूनल" में उसकी शिकायत कर सकता है और, वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला उसके लिए बाध्यकारी होगा.. क्योंकि, इसे कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता है.
(ये नियम काग्रेस सरकार का बनाया हुआ है)
खैर... तो राजस्थान के जमीन के मामले में भी ऐसा ही हुआ.
उस जमीन पर मौजूद चबूतरे और दीवार की वजह से वक्फ बोर्ड के सर्वेयर 1965 में उस जमीन पर गए और उस जमीन को वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित कर उसे वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में चढ़ा लिया.
कालांतर में... 1995 में नया Act आने के बाद वक्फ बोर्ड के सर्वेयर ने फिर उसे वक्फ की संपत्ति घोषित करते हुए उसे अपने रिकॉर्ड में चढ़ा लिया.
इसीलिए... जब 2010 में राजस्थान सरकार ने इस जमीन को माइनिंग हेतु जिंदल ग्रुप को दिया तो वहां के लोकल अंजुमन कमिटी ने इस पर आपत्ति की और इसे वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताते हुए वक्फ बोर्ड को चिट्ठी लिख दी.
इसके बाद वक्फ बोर्ड इसे अपनी संपत्ति बताते हुए सरकार के निर्णय पर आपत्ति जताई और वहाँ बाउंड्री देना शुरू कर दिया.
इस पर मामला राजस्थान हाईकोर्ट चला गया जहाँ फिर वक्फ बोर्ड ने आपत्ति जताई कि 1965 और 1995 की वक्फ एक्ट के तहत ये संपत्ति हमारी है और ये हमारे रिकॉर्ड में भी चढ़ा हुआ है.
इसीलिए, सरकार इसे किसी को नहीं दे सकती है और न ही कोर्ट इस केस को सुन सकती है क्योंकि अगर कोई डिस्प्यूट है भी...
तो, उसे हमारा वक्फ ट्रिब्यूनल सुनेगा न कि कोर्ट.
इस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने आर्टिकल 226 का हवाला देते हुए वक्फ बोर्ड को क्लियर किया कि... वो किसी भी ट्रिब्यूनल या लोअर कोर्ट से ऊपर है और आर्टिकल 226 के तहत वो इस केस को सुन सकता है.
और, हाईकोर्ट ने इस मामले में एक स्पेशलाइज्ड कमिटी बिठा दी.
2012 में कमिटी ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी एवं उसके बाद कोर्ट ने आदेश दे दिया कि ये वक्फ बोर्ड की संपत्ति नहीं है और इसे माइनिंग के लिए दिया जा सकता है.
इस फैसले से वक्फ बोर्ड नाखुश होकर सुप्रीम कोर्ट चला गया.
लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में मामला फंस गया.
क्योंकि... सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आपने क्या सर्वे किया है अथवा आपके रिकॉर्ड में क्या चढ़ा है... वो सब जाने दो.
हम तो कानून जानते हैं...
और, कानून के अनुसार (वक्फ एक्ट 1995 की धारा 3 R के अनुसार) कोई भी प्रोपर्टी वक्फ की प्रॉपर्टी तभी हो सकती है अगर वो निम्न शर्तों को पूरा करता है ...
1. वो जिसकी प्रोपर्टी है अगर वो इसे वक्फ के तौर पर अर्थात इस्लामिक पूजा प्रार्थना के लिए सार्वजनिक तौर पर इस्तेमाल करता हो/ करता था.
2. वो संपत्ति वक्फ के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए दान की गई हो.
3. राज्य सरकार उस जमीन को किसी रिलिजियस काम के लिए ग्रांट की हो.
4. अथवा, उस जमीन के मजहबी उपयोग के लिए जमीन के मालिक ने डीड बना कर दी हो.
सुप्रीम ने आगे कहा कि वक्फ एक्ट 1995 के अनुसार उपरोक्त शर्तों को पूरा करने वाली प्रोपर्टी ही वक्फ की प्रॉपर्टी मानी जायेगी.
इसके अलावा कोई भी संपत्ति वक्फ की संपत्ति नहीं है.इस अनुसार... जिस प्रॉपर्टी पर आप दावा कर रहे हो...
उस प्रॉपर्टी को न तो आपको किसी ने दान में दी है, न ही उसकी कोई डीड है और न ही वो आपने खरीदी है.
इसीलिए, वो संपत्ति आपकी नहीं है और उसे माइनिंग के लिए दिया जाना बिल्कुल कानून सम्मत है.
👉👉 अब सवाल है कि ये तो महज एक फैसला है और इसमें माइल स्टोन जैसा क्या है ???
तो, इसके लिए हम थोड़ा इतिहास में जाते हैं कि असल में हुआ क्या है.
जब 1945 के आसपास लगभग ये तय हो चुका था कि भारत अब आजाद हो जाएगा और भारत का विभाजन भी लगभग तय ही था...
तो, भारत के वैसे मूतलमान जो.. पिग्गिस्तान जाने का मन बना चुके थे.. (जिसमें से बहुत सारे नबाब और छोटे छोटे रियासतों के राजा, जमींदार वगैरह थे) ने आनन फानन में अपनी जमीनों पर वक्फ बना दिया और भारत छोड़कर पिग्गिस्तान चले गए.
जिसके बाद देश में मुसरिम तुष्टिकरण में आकंठ डूबी सरकार के आ जाने के बाद वो संपत्ति/जमीन वक्फ बोर्ड के पास चली गई.
ऐसी लगभग 6-8 लाख स्क्वायर किलोमीटर जमीन होने का अंदेशा है.
इसके अलावा... कालांतर में रेलवे एवं नगर निगम की खाली जमीन, सार्वजनिक मैदानों, किसी निजी व्यक्ति के खाली प्लाटों आदि पर यहाँ के मूतलमानों अथवा शरारती तत्वों ने मिट्टी के कुछेक ढेर जमा कर दिए और ये दावा कर दिया कि.... यहाँ हमारी महजिद/ ईदगाह/ कब्रिस्तान है...
इसीलिए, ये वक्फ की संपत्ति है.
और, चूंकि 2014 से पहले लगभग हर जगह इनकी तुष्टिकरण वाली सरकारें थी तो उन्होंने इनके दावे को आंख बंद कर मान लिया और उन संपत्तियों को वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में जाने दिया.
लेकिन, अब सुप्रीम कोर्ट ने ये स्पष्ट आदेश पारित कर दिया है कि...
👉1947 से पहले ट्रांसफर किये गए किसी भी संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का अधिकार नहीं होगा क्योंकि उसके कागज मान्य नहीं होंगे.
👉इसके अलावा... 1947 के बाद भी जिन संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड अपना अधिकार जताता है.... उसके कागज उसे दिखाने होंगे कि वे संपत्ति उसके पास आये कहाँ से ???
और, वक्फ बोर्ड के पास संपत्ति आने के वही शर्त हैं जो ऊपर उल्लेखित किया गया है.
👉👉👉अगर... वक्फ बोर्ड अपने किसी संपत्ति का प्रॉपर कागज नहीं दिखा पाता है तो सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के फैसले के आलोक में वो जमीन/संपत्ति अपने मूल मालिक को वापस दे दी जाएगी.
👉और, अगर जमीन/ संपत्ति का मूल मालिक बंटवारे के बाद देश छोड़कर जा चुका है अथवा 1962, 1965 & 1971 के युद्ध में पिग्गिस्तान का साथ देने के आरोप के कारण भाग गया है.
तो, उस स्थिति में वो संपत्ति "शत्रु संपत्ति अधिनियम 2017" के तहत सरकार की हो जाएगी.
अब इसमें हमें और आपको सिर्फ करना ये है कि...
अगर आपके आसपास कोई ऐसी संपत्ति/जमीन है जो कि आपके अनुसार वक्फ बोर्ड का नहीं होना चाहिए तो आप इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का हवाला देते हुए संबंधित सरकार अथवा कोर्ट को सूचित कर सकते हैं.
और, सरकार / कोर्ट उस जमीन को वक्फ बोर्ड के अतिक्रमण से मुक्त करवाने के लिए बाध्य होगी क्योंकि ये सुप्रीम कोर्ट का आदेश है.
और हाँ... अगर आपकी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है तो भी आप इस पोस्ट को अधिकाधिक लोगों/ग्रुप्स तक प्रचारित कर दें..
ताकि, अगर किसी के जानकारी में ऐसा हो तो वो इस संबंध में उचित कदम उठा सके.
ध्यान रहे कि... 1947 में बंटवारे के समय पूर्वी एवं पश्चिमी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) को मिलाकर उन्हें लगभग 10 लाख 32 हजार स्क्वायर किलोमीटर जमीन दी गई थी और एक अनुमान के मुताबिक कम से कम इतनी ही जमीन/संपत्ति आज भारत में वक्फ बोर्ड के कब्जे /रिकॉर्ड में दर्ज़ है।

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