03/07/2026
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण संदेश: मतदाता सूची से नाम हटना = नागरिकता समाप्त होना नहीं
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद यह कानूनी विवाद सामने आया। वरिष्ठ पत्रकार आर. राजगोपाल ने दावा किया कि मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर उनके पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए प्रतिकूल पुलिस सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि—
✅ केवल नाम की वर्तनी या रिकॉर्ड की मामूली त्रुटियों के आधार पर किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह नहीं किया जा सकता।
✅ मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता समाप्त होने का प्रमाण नहीं है।
✅ चुनाव आयोग केवल मतदाता सूची के उद्देश्य से सीमित स्तर पर नागरिकता का परीक्षण कर सकता है, अंतिम निर्णय देने का अधिकार उसे नहीं है।
✅ यदि नागरिकता पर संदेह हो तो मामला कानून के अनुसार केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा जाएगा।
✅ केवल मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर पासपोर्ट नवीनीकरण रोकना या अन्य नागरिक अधिकारों से वंचित करना उचित नहीं माना जा सकता।
महत्वपूर्ण: मतदाता सूची से नाम हटने का प्रभाव केवल मतदान के अधिकार तक सीमित है, नागरिकता या अन्य वैधानिक अधिकारों पर नहीं।
Patna High Court