Advocate Bhubneshwar Mahto

Advocate  Bhubneshwar Mahto गरीब असहाय लोगों को निशुल्क न्याय दिलाना मेरा लक्ष्य मेरा कर्तव्य एवं मेरा धर्म

15/08/2024

आप सबों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

29/07/2024
16/05/2024
09/05/2024
10/11/2023

🙏बाऊ हो हमारा हिस्सा चाही🙏 यह कविता मेरे पुत्र रोहित कुमार के द्वारा लिखा गया है

बुढ़वा बैठल मुंह सुखा के
भोजन मिलेगा खूब कलहा के
बेटा बोला है बाप को भक बरगाही
पर बाऊ हो हमरा जमीन में हिस्सा चाही।

बहिन बिहाये
खूब उड़ाए
धन दौलत सब खूब लुटाए

पर हम नही दिए है एक्को पाई
पर बाऊ हो हमारा जमीन में हिस्सा चाही।

मछली बनेगा
ताड़ी चखना रोज चलेगा
घर पर तरुआ रोज छनेगा

आपके खाते वक्त खाली रहेगा कढ़ाई
पर बाऊ हो हमरा जमीन में हिस्सा चाही ।

घर जब फल आएगा
पोता बेटा सब खायेगा
बुढ़वा खाकर किधर जायेगा

एक कप चाय मांगने पर पुतोह लेगी चमकाई
पर बाऊ हो हमरा जमीन में हिस्सा चाही।

आपके भूख पर कहा किसी को फरक पड़ेगा
मछली मुर्गा नही बनेगा
बार बार चूल्हा नहीं जुटेगा

जायदा बोलने पर पुतोह देगी दस गो बात सुनाई
पर बाऊ हो हमरा जमीन में हिस्सा चाही।


रचनाकर:–रोहित राज रघुवंशी ✍️
(रोसड़ा)

05/09/2023

शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर मैं सभी छात्र एवं छात्राओं के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं

13/07/2023

🙏बुधना शिकायत बहुत बतियाता है🙏

इतना जलन करके नफरत करके किधर जायेगा
रे एक दिन हम भी मरेगे बुधना तु भी मर जायेगा
कुछ काम करो खुद का नाम करो
थूकेगा आसमान मे तो थूक मुँह पर ही आयेगा

कुछ काम करो खुद का नाम करो हर कोई समझाता है
फिर भी बुधना शिकायत बहुत बतियाता है✍️

जलन क्यों हुई है तुमको लोगों के आगे बढ़ने से
बेवजह तुम रोक रहे हो राही को मंजिल गढ़ने से
चोरी,बेईमानी, लोगों का बुरा चाहना यही है फितरत
तुमको क्या दिक्कत है किताब ईमानदारी का पढ़ने से

कुछ काम करो खुद का नाम करो हर कोई समझाता है
फिर भी बुधना शिकायत बहुत बतियाता है✍️

हे महादेव🚩 ऐसे लोगों को आप प्रभु सद्बुद्धि दीजिये
इन लोगों का कुछ जुगाड़ लगा इनकी वृद्धि कीजिये
प्रभु आपने विष पिया है मानवता के खातिर
मानव के मन से लोभ इष्या द्वेष प्रभु हर लीजिए

कुछ अच्छा काम करो इसका दिल इसको समझाता है
फिर भी बुधना शिकायत बहुत बतियाता है✍️

दूसरे को नीचा दिखाने के चक्कर में खुद ही गिर गया है
हमेशा दूसरो का बुरा चाहना इसका जमीर इतना मर गया है
छल प्रपंच से अक्सर लोगों का दिल दुखाया धोखा दिया
रे तुम्हारी मानवता खत्म हो गई या तेरा जमीर मर गया है

कुछ अच्छा काम करो इसका दिल इसको समझाता है
फिर भी बुधना शिकायत बहुत बतियाता है✍️

इतनी हाय इतनी बद्दुआ लेकर बोल किधर जायेगा
यहां जो करना कर लो वहां पर मुंह कैसे दिखलाएगा
अभी समय है कुछ करो भलाई अच्छा कर्म करो
एक दिन हम भी मरेंगे बुधना तुम भी मर जायेगा

ना जाने यह घर जाकर अपने बच्चों को मुंह कैसे दिखलाता है
ओ भाई सब बुधना शिकायत बहुत बतियाता है,✍️

रचनाकर :– रोहित राज रघुवंशी ✍️
(रोसड़ा)
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मैं अपनी रचना में बुधना नाम अक्सर इस्तेमाल करता है हूं मेरा मकसद किसी बुधना नाम के व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी करना या उनकी भावना को ठेस पहुंचाना नही है, फिर आपको तकलीफ होती है तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं।
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🙏✍️माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते✍️🙏पइया परते गोर धरैतेभैया जी के जयकार लगैतेकुर्ता पहिन कर हाथ जोड़ करमाय गे गाड़ी अयितो ...
29/06/2023

🙏✍️माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते✍️🙏

पइया परते गोर धरैते
भैया जी के जयकार लगैते
कुर्ता पहिन कर हाथ जोड़ कर
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते

मुर्गा मिलतो दारूओ मिलतौ
छोटका मोबाइल संग रिचार्जो मिलतौ
अपना टोला में गुल अब खिलतौ
बड़का बड़का वादा फेकते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते

भीड़ के बीच से उ गुजरतौ
तोहर हाथ केय खाना खैतो ,पानियो पितौ
ई टुटल खाट पर बैठबो करतौ
जइतो यहां से बड़का स्वपन दिखइते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते

बाऊ के रोजगार भारी मिलतौ
भीड़ में रहै के देहारी मिलतौ
भर दिन, नेता अपन दुआरी मिलतौ
घूमतो गांव गांव, चुनाव चिन्ह समझइतै
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते

नेतवन के बेटा चुपचाप रहतौ
चाची चाची भर दिन कहतौ
बाबू के चुपचाप दारू पिलैतौ
जितला पर , घुमतो ऊ बंदूक लहरइतै
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते

कैह देभी ते गोरों पकरतौ
पिछला गलती ले माफी मांगतौ
मगरमच्छ के लोर गिरैतौ
जातियारी कह कर सबके फुलैते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते

तोरा प्रति सम्मान देखैतौ
सबके अपन माय बहिन बतैतौ
तोहर चरण में माथा टेकतौ
तेकर बेटा पकड़ाए छै, बेटी पुतोह छेड़ैते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते

चमचा वोकर सब आंख गुररतौ
बूथ पर भर दिन खारा रहतौ
वोट ने देभि तेय गारिओ बकतौ

वोट देल्ही केकरा भैर दिन दिखतौ पुछैते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते

चुनाव के बादल जभिये हटतौ
फेर गांव में सूखे परतौ
खाना छोड़, तोहर दुआर पर हाथों नए धुतौ
दिखतों बेटा वोकर नया बुलेट चलइतै
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते

स्कार्पियो किनतौ, घर बनैतौ
सरकारी माल पर मौज उड़ैतौ
चमचा वोकर सब आंख दिखइतौ
पकड़ल जैतो , माय बहिन पर नजर गरैते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते

अगर बाबू जे मुंह लगैतौ, वादा वोकर जे याद दिलैतौ
चमचा वोकर सब गाली देतौ, मुंह फुलैतौ
कही बाबू के अपन मजदूरी करतौ, खैतौ कमैतौ

तैयो ने मानतौ तेय, पकरावल जैतो दारू बेचैते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते

रचनाकार - रोहित राज रघुवंशी✍️

उम्मीद है आप लोगों को यह कविता पसंद आई होगी और आप लोगों का प्यार और आशीर्वाद मुझ पर सदा बना रहेगा,
मैं हमेशा उन लोगों पर व्यंग करता हूं उन लोगों के बारे में लिखता हूं जो वास्तव में समाज हित में काम नहीं करते हैं या फिर जो चीज वास्तविक है,
मेरी बातों को वह लोग दिल पर ना लें जो वास्तव में समाज हित में काम कर रहे हैं, फिर भी अगर किन्ही व्यक्ति को मेरी बातों से कोई तकलीफ पहुंचे तो मैं उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं । 🙏



- रोहित राज रघुवंशी✍️
(रोसड़ा)

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