29/06/2023
🙏✍️माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते✍️🙏
पइया परते गोर धरैते
भैया जी के जयकार लगैते
कुर्ता पहिन कर हाथ जोड़ कर
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते
मुर्गा मिलतो दारूओ मिलतौ
छोटका मोबाइल संग रिचार्जो मिलतौ
अपना टोला में गुल अब खिलतौ
बड़का बड़का वादा फेकते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते
भीड़ के बीच से उ गुजरतौ
तोहर हाथ केय खाना खैतो ,पानियो पितौ
ई टुटल खाट पर बैठबो करतौ
जइतो यहां से बड़का स्वपन दिखइते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते
बाऊ के रोजगार भारी मिलतौ
भीड़ में रहै के देहारी मिलतौ
भर दिन, नेता अपन दुआरी मिलतौ
घूमतो गांव गांव, चुनाव चिन्ह समझइतै
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते
नेतवन के बेटा चुपचाप रहतौ
चाची चाची भर दिन कहतौ
बाबू के चुपचाप दारू पिलैतौ
जितला पर , घुमतो ऊ बंदूक लहरइतै
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते
कैह देभी ते गोरों पकरतौ
पिछला गलती ले माफी मांगतौ
मगरमच्छ के लोर गिरैतौ
जातियारी कह कर सबके फुलैते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते
तोरा प्रति सम्मान देखैतौ
सबके अपन माय बहिन बतैतौ
तोहर चरण में माथा टेकतौ
तेकर बेटा पकड़ाए छै, बेटी पुतोह छेड़ैते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते
चमचा वोकर सब आंख गुररतौ
बूथ पर भर दिन खारा रहतौ
वोट ने देभि तेय गारिओ बकतौ
वोट देल्ही केकरा भैर दिन दिखतौ पुछैते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते
चुनाव के बादल जभिये हटतौ
फेर गांव में सूखे परतौ
खाना छोड़, तोहर दुआर पर हाथों नए धुतौ
दिखतों बेटा वोकर नया बुलेट चलइतै
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते
स्कार्पियो किनतौ, घर बनैतौ
सरकारी माल पर मौज उड़ैतौ
चमचा वोकर सब आंख दिखइतौ
पकड़ल जैतो , माय बहिन पर नजर गरैते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते
अगर बाबू जे मुंह लगैतौ, वादा वोकर जे याद दिलैतौ
चमचा वोकर सब गाली देतौ, मुंह फुलैतौ
कही बाबू के अपन मजदूरी करतौ, खैतौ कमैतौ
तैयो ने मानतौ तेय, पकरावल जैतो दारू बेचैते
माय गे गाड़ी अयितो धूल उरैते
रचनाकार - रोहित राज रघुवंशी✍️
उम्मीद है आप लोगों को यह कविता पसंद आई होगी और आप लोगों का प्यार और आशीर्वाद मुझ पर सदा बना रहेगा,
मैं हमेशा उन लोगों पर व्यंग करता हूं उन लोगों के बारे में लिखता हूं जो वास्तव में समाज हित में काम नहीं करते हैं या फिर जो चीज वास्तविक है,
मेरी बातों को वह लोग दिल पर ना लें जो वास्तव में समाज हित में काम कर रहे हैं, फिर भी अगर किन्ही व्यक्ति को मेरी बातों से कोई तकलीफ पहुंचे तो मैं उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं । 🙏
- रोहित राज रघुवंशी✍️
(रोसड़ा)