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09/04/2017

जय हिन्द, वंदे मातरम्

31/03/2017

sabhi mitron se anrodh nivedan hai ki kripya mujhe kisi bachche ka gum hona ya kisi nabalig bachche ka kisi ke dwara kisi kam ya kisi chij mein istemal karne ki suchna dein, Jisse uska bhawisya bachaya ja sake w desh ki sewa ki ja sake, Jay Hind

31/03/2017

sabhi mitron se anrodh nivedan hai ki kripya mujhe kisi bachche ka gum hona ya kisi nabalig bachche ka kisi ke dwara kisi kam ya kisi chij mein istemal karne ki suchna dein. Jisse uska bhawisya bachaya ja sake w desh ki sewa ki ja sake. Jay Hind

25/03/2016

र॔गोत्सव विशेष ✏
यू ओढ़ लू हर रंग मै,,,
यू ओढ़ लू हर रंग,,,,
लाल,नीला,हरा,गुलाबी, ,,
बचे ना कोई रंग, ,,,,,
रहे ना कोई राग द्वेश,,,
हर दरार भर जाये,,,
इन रंगो के संग,,,
मिल जाये इस रूह को राहत,,,
जो घुले रंग हर अंग अंग,,,
बह जाये ये जीवन, ,,,
अदभुत रंगों के संग,,,,,,,!!!

31/10/2015

Good Evening Friends,
विश्वामित्र को ब्राह्मणत्व की प्राप्ति - बालकाण्ड (16)
वार्ता जारी रखते हुए शतानन्दजी ने कहा, "हे रामचन्द्र! देवताओं के चले जाने के बाद विश्वामित्र ब्राह्मणत्व प्राप्त करने के लिये पूर्व दिशा में जाकर पुनः कठोर तपस्या करने लगे‌।‌ बिना अन्न जल ग्रह‌‌ण किये वर्षों तक तपस्या करते करते उनकी देह सूख कर काँटा बन ग‌ई। इस तपस्या को भ़ंग करने के लिए नाना प्रकार के विघ्न उपस्थित हुए किन्तु उन्होंने उन सबका निवारण किया और वह भी बिना क्रोध किये। तपस्या की अवधि समाप्त होने पर जब वे अन्न ग्रहण करने के लिए बैठे। ज्योंही प्रथम ग्रास उठाया भी न था कि ब्राह्मण भिक्षुक के रुप में आकर इन्द्र ने भोजन की याचना की। विश्वामित्र ने अपना भोजन उस याचक को दे दिया और स्वयं निराहार रह गये।
"इन्द्र को भोजन दे देने के पश्चात विश्वामित्र के मन में विचार आया कि सम्भवत: अभी मेरे भोजन ग्रहण करने का अवसर नहीं आया है, इसीलिये याचक के रूप में यह विप्र उपस्थित हो गया। मुझे अभी और तपस्या करना चाहिये। अतएव वे मौनव्रत धारण कर फिर से दीर्घकालीन तपस्या में लीन हो गये। इस बार उन्होंने प्राणायाम से श्वाँस रोक कर महादारुण तप किया। उनके तप से प्रभावित देवताओं ने ब्रह्माजी से निवेदन किया कि भगवन्! विश्वामित्र की तपस्या अब पराकाष्ठा को पहुँच गई है। अब वे क्रोध और मोह की सीमाओं को पार कर गये हैं। अब इनके तेज से सारा संसार प्रकाशित हो उठा है। सूर्य और चन्द्रमा का तेज भी इनके तेज के सामने फीका पड़ गया है। अतएव आप प्रसन्न होकर इनकी अभिलाषा पूर्ण कीजिये।
"देवताओं के इन वचनों को सुनकर ब्रह्मा जी उन से देवताओं को साथ लेकर विश्वामित्र जी के पास पहुँचे और बोले कि हे विश्वामित्र! निःसन्देह तुम्हारी तपस्या प्रशंसनीय है। हम तुमसे अत्यन्त प्रसन्न हैं और तुम्हें ब्राह्मणश्रेष्ठ की उपाधि प्रदान करते हैं। तुम संसार में महान यश के भागी बनोगे। ब्रह्मा जी से यह वरदान पाकर विश्वामित्र ने कहा कि हे भगवन्! जब आपने मुझे यह वरदान दिया है तो मुझे ओंकार, षट्कार तथा चारों वेदों का ज्ञान भी प्रदान करें। प्रभो! अपनी तपस्या को मैं तभी सफल समझूँगा जब वशिष्ठ जी मुझे ब्राह्मण और ब्रह्मर्षि स्वीकार करेंगे।
"विश्वामित्र की बात सुन कर समस्त देवताओं ने वशिष्ठ जी के पास जाकर उन्हें सारा वृत्तान्त सुनाया। उनकी तपस्या की कथा सुनकर वशिष्ठ जी स्वयं विश्वामित्र के पास पहुँचे और उन्हें अपने हृदय से लगा कर बोले कि विश्वामित्र जी! आप वास्तव में ब्रह्मर्षि हैं। मैं आज से आपको ब्राह्मण स्वीकार करता हूँ।
"हे रघुनन्दन! इतनी कठोर तपस्याओं एवं भारी संघर्ष के पश्चात् विशवामित्र जी ने यह महान पद प्राप्त किया है। ये बड़े विद्वान, धर्मात्मा, तेजस्वी एवं तपस्वी हैं।"
राजा जनक भी शतानन्द द्वारा वर्णित विश्वामित्र जी की कथा सुन रहे थे। वे बोले, "हे कौशिक! मैं आपको और इन राजकुमारों को मिथिला में पाकर कृतार्थ हो गया हूँ। अब अधिक समय व्यतीत हो चला है। भगवान भास्कर अस्ताचल की ओर जा रहे हैं। सन्ध्या-उपासना का समय हो गया है। इसलिये मुझे आज्ञा दीजिये। प्रातःकाल पुनः आपके दर्शन के लिये आउँगा।" इस प्रकार मुनि से आज्ञा ले राजा जनक अपने मन्त्रियों सहित विदा हये। विश्वामित्र जी भी दोनों राजकुमारों के साथ अपने निश्चित स्थान के लिये चल पड़े
Adv Avinash Kumar ojha

04/04/2015

Good Morning Friends,

यहाँ सब कुछ बिकता है ,
दोस्त रहना ज़रा संभल के ....
बेचने वाले हवा भी बेच देते हैं ,
गुब्बारों में डाल के ....
सच बिकता है , झूट बिकता है ,
बिकती है हर कहानी …
तीन लोक में फैला है ,
फिर भी बिकता है बोतल में पानी ....
कभी फूलों की तरह मत जीना ,
जिस दिन खिलोगे , टूट कर बिखर जाओगे ....
जीना है तो पत्थर की तरह जियो ....
जिस दिन तराशे गए , खुदा बन जाओगे …।

With...
Adv Avinash Kumar Ojha

30/03/2015

आंदोलन समाप्त करने के नुक्स अपनाते हुए बीते दिन में कहा गया की तहसील वापस अजाएगी। किन्तु जब तक आदेश लिखित रूप में न आए तब तक इसे अफवाह समझा जाए। लखनऊ के वकीलों को बेवकूफ न समझे प्रशासन।

एडवोकेट अविनाश कुमार ओझा

22/03/2015

Happy Navratri Friends

12/03/2015

सुभप्रभात मित्रों,
इलाहाबाद जिला कचहरी में दारोगा शैलेंद्र सिंह ने युवा अधिवक्ता नवी अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी है।
इसके विरोध में बार काउंसिल ऑफ यूपी ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का एलान किया है।
मैं अधिवक्ताओं से सहयोग की अपील करता हूँ, कृपया अपने मृतक साथी के लिए हङताल में सहयोग करें।
अधिवक्ता एकता जिन्दाबाद
आपका मित्र,
अधिवक्ता अविनाश कुमार ओझा

10/03/2015

सुभ प्रभात मित्रों,
शनिवार को लखनऊ सदर तहसील को स्थान्नातरित करने के बिरोध प्रशासन ने पहले अधिवक्ताओ पर पुलिस से लाठी चलवायी और आज प्रशासन ने अधिवक्ताओ के बिरोध पर पुलिस से पुन: अधिवक्ताओ पर लाठिया चलवायी और अधिवक्ताऔ की गाड़ियो को पुलिस से तुड़वाया उन गाड़ियो मे लखनऊ बार एशोसिशन के अध्यक्ष श्रीसी•एल•दिक्षित जी की भी गाड़ी है आम जनता मे भगदड़ मच गयी,और शायद अधिवक्ता शिशिर चतुॅवेदी का हाथ टूट गया है जो लखनऊ बार एसोशिएन के पूवॅ सयुक्त मन्त्री भी रहे है धटना प्रकाशन मिडिया मे न हो इसलिए प्रशासन ने जिलाधिकारी परिसर मे मिडिया के प्रवेश पर लगाया रोक।।।।
आपका मित्र,
अधिवक्ता अविनाश ओझा

10/03/2015

Good Morning Friends,
Happenings which has occurred on 08/03/2015 night in Sadar Tahsil LKO Campus & again Lathi charge on 09/03/2015 at Collectorate LKO is very graceless behavior. I'm very unhappy with the same. The ADM's are generally very nice and helpful for all the Advocate's & also for the public. He always tried to settle the issue at all level.The State Govt. is responsible for Graceless work due to not taken necessary action well in advance to avoid such happenings.
With....
Adv Avinash Kumar Ojha

08/03/2015

सुभप्रभात मित्रों,
मीठे बोल बोलिए क्योंकि अलफाजों में जान होती है
इनही से आरती , अरदास और इनही से आजान होती है
यह समुद्र के वह मोती हैं , जिनसे इंसानों की पहचान होती है

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