10/07/2026
सुप्रीम कोर्ट में हुई घटना घोर निंदनीय — बार और बेंच दोनों की गरिमा सर्वोपरि
मैं, हिमांशु सिंह पटेल, अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ, सर्वोच्च न्यायालय में प्रबल प्रताप द्वारा किए गए अमर्यादित आचरण की कठोर शब्दों में निंदा करता हूँ। न्यायालय की गरिमा, मर्यादा और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान प्रत्येक नागरिक तथा प्रत्येक अधिवक्ता का सर्वोच्च दायित्व है। असहमति का समाधान केवल कानून के दायरे में ही होना चाहिए, न कि न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुँचाकर।
साथ ही, एक अधिवक्ता होने के नाते मैं न्यायपालिका से विनम्र निवेदन करना चाहता हूँ कि बार को केवल पक्षकार का प्रतिनिधि न समझा जाए, बल्कि न्याय प्रशासन का अभिन्न सहयोगी माना जाए। अधिवक्ता प्रतिदिन न्यायालयों में वादकारियों की पीड़ा, संघर्ष और अपेक्षाओं का सामना करते हैं। उनकी बातों, व्यावहारिक कठिनाइयों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े अनुभवों को भी संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए।
बार और बेंच न्याय रूपी रथ के दो समान पहिए हैं। दोनों के बीच पारस्परिक सम्मान, संवाद, धैर्य और विश्वास जितना मजबूत होगा, न्याय व्यवस्था उतनी ही सुदृढ़ होगी। न्यायपालिका की गरिमा अक्षुण्ण रहना आवश्यक है, वहीं अधिवक्ताओं के सम्मान और उनकी न्यायोचित बातों को उचित महत्व मिलना भी उतना ही आवश्यक है।
आज की घटना की मैं पुनः कठोर शब्दों में भर्त्सना करता हूँ। साथ ही यह अपेक्षा भी करता हूँ कि बार और बेंच मिलकर ऐसा न्यायिक वातावरण निर्मित करें, जहाँ न्यायालय की गरिमा भी सुरक्षित रहे और अधिवक्ताओं एवं वादकारियों को यह विश्वास भी बना रहे कि उनकी बात पूरी संवेदनशीलता और निष्पक्षता से सुनी जाएगी।
न्यायपालिका और अधिवक्ता प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि न्याय के साझा उद्देश्य के सहभागी हैं। न्याय की प्रतिष्ठा तभी सुरक्षित रहेगी जब बार और बेंच दोनों एक-दूसरे के सम्मान, गरिमा और दायित्व का समान आदर करेंगे।
— हिमांशु सिंह पटेल
अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ