23/05/2026
भारत की वकालत व्यवस्था पर बड़ा सवाल: BCI Verification Drive, आंकड़े और संभावित फंड का विश्लेषण
देश में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की Certificate of Practice (COP) Verification Drive को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस तेज हो रही है—यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे legal profession की credibility, transparency और regulatory structure से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।
---
⚖️ 🇮🇳 भारत में वकीलों की स्थिति (Official Data)
कानून एवं न्याय मंत्रालय के अनुसार भारत में लगभग 20.13 लाख (20,13,081) पंजीकृत वकील विभिन्न State Bar Councils में नामांकित हैं।
📊 प्रमुख राज्य:
उत्तर प्रदेश: ~4 लाख वकील
महाराष्ट्र एवं गोवा: ~1.91 लाख
दिल्ली: ~1.49 लाख
👉 यह संख्या सभी enrolled advocates को दर्शाती है, जिसमें कई ऐसे नाम भी शामिल हो सकते हैं जो वर्तमान में active practice में नहीं हैं।
---
⚖️ BCI Verification / COP Rules (2015)
Bar Council of India के Certificate of Practice (COP) Verification Rules, 2015 के तहत:
वकीलों की active practice verification का प्रावधान
बार रोल की authenticity सुनिश्चित करना
“active” और “non-active” entries के बीच अंतर स्पष्ट करना
राज्य बार काउंसिल द्वारा implementation
📌 हालिया चर्चाओं के अनुसार लगभग 30%–40% verification pending बताया गया है, जो एक बड़ा administrative backlog दर्शाता है।
---
💰 संभावित वित्तीय प्रभाव (₹500 फीस आधार पर)
यदि COP verification fee ₹500 मानी जाए:
📌 30% भागीदारी:
6,00,000 वकील × ₹500 = ₹30 करोड़
📌 40% भागीदारी:
8,00,000 वकील × ₹500 = ₹40 करोड़
👉 संभावित संग्रह: ₹30 करोड़ से ₹40 करोड़
---
⚖️ महत्वपूर्ण विश्लेषण
भारत में enrolled advocates ≠ active practicing advocates
verification backlog system की एक बड़ी चुनौती है
इससे legal profession की transparency और credibility पर सीधा प्रभाव पड़ता है
साथ ही यह एक बड़ा policy reform issue बनता जा रहा है