रोहित शर्मा उच्च न्यायालय

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रोहित शर्मा उच्च न्यायालय “Empowering Legal Knowledge, Enriching Justice” A/R 0299/2021
अधिवक्ता, उच्च न्यायालय इलाहाबाद, प्रयागराज उत्तर प्रदेश

🔱 बटुक भैरव जयंती 🔱भगवान शिव के शांत, सरल और बाल स्वरूप बटुक भैरव का जन्मोत्सव इस पावन तिथि पर श्रद्धा और भक्ति के साथ म...
24/05/2026

🔱 बटुक भैरव जयंती 🔱

भगवान शिव के शांत, सरल और बाल स्वरूप बटुक भैरव का जन्मोत्सव इस पावन तिथि पर श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

यह दिन साहस, सुरक्षा, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

"बटुक भैरव की कृपा से जीवन में सुख, शांति और सभी विघ्नों का नाश हो।"

🙏 बटुक भैरव जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

24/05/2026
23/05/2026

भारत की वकालत व्यवस्था पर बड़ा सवाल: BCI Verification Drive, आंकड़े और संभावित फंड का विश्लेषण

देश में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की Certificate of Practice (COP) Verification Drive को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस तेज हो रही है—यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे legal profession की credibility, transparency और regulatory structure से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।

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⚖️ 🇮🇳 भारत में वकीलों की स्थिति (Official Data)

कानून एवं न्याय मंत्रालय के अनुसार भारत में लगभग 20.13 लाख (20,13,081) पंजीकृत वकील विभिन्न State Bar Councils में नामांकित हैं।

📊 प्रमुख राज्य:

उत्तर प्रदेश: ~4 लाख वकील

महाराष्ट्र एवं गोवा: ~1.91 लाख

दिल्ली: ~1.49 लाख

👉 यह संख्या सभी enrolled advocates को दर्शाती है, जिसमें कई ऐसे नाम भी शामिल हो सकते हैं जो वर्तमान में active practice में नहीं हैं।

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⚖️ BCI Verification / COP Rules (2015)

Bar Council of India के Certificate of Practice (COP) Verification Rules, 2015 के तहत:

वकीलों की active practice verification का प्रावधान

बार रोल की authenticity सुनिश्चित करना

“active” और “non-active” entries के बीच अंतर स्पष्ट करना

राज्य बार काउंसिल द्वारा implementation

📌 हालिया चर्चाओं के अनुसार लगभग 30%–40% verification pending बताया गया है, जो एक बड़ा administrative backlog दर्शाता है।

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💰 संभावित वित्तीय प्रभाव (₹500 फीस आधार पर)

यदि COP verification fee ₹500 मानी जाए:

📌 30% भागीदारी:

6,00,000 वकील × ₹500 = ₹30 करोड़

📌 40% भागीदारी:

8,00,000 वकील × ₹500 = ₹40 करोड़

👉 संभावित संग्रह: ₹30 करोड़ से ₹40 करोड़

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⚖️ महत्वपूर्ण विश्लेषण

भारत में enrolled advocates ≠ active practicing advocates

verification backlog system की एक बड़ी चुनौती है

इससे legal profession की transparency और credibility पर सीधा प्रभाव पड़ता है

साथ ही यह एक बड़ा policy reform issue बनता जा रहा है

देश की वकालत व्यवस्था पर बड़ा सवाल | BCI Verification Drive चर्चा मेंBar Council of India के चेयरपर्सन द्वारा हाल ही में...
23/05/2026

देश की वकालत व्यवस्था पर बड़ा सवाल |
BCI Verification Drive चर्चा में

Bar Council of India के चेयरपर्सन द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान ने legal fraternity में गंभीर बहस छेड़ दी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने यह आशंका जताई है कि भारत में लगभग 35%–40% तक ऐसे लोग हो सकते हैं जो फर्जी या संदिग्ध लॉ डिग्री के आधार पर वकालत कर रहे हों। यह बयान उस समय आया है जब पूरे देश में advocate verification drive चलाया जा रहा है।

इस अभियान के दौरान कई अधिवक्ताओं द्वारा दस्तावेज़ सत्यापन न कराने की स्थिति भी सामने आई है, जिससे पारदर्शिता और credential verification को लेकर चिंता बढ़ी है।

 #कानपुर: इंसाफ की मांग ने बढ़ाई हलचलमां का इलाज के दौरान हाथ काटे जाने के मामले में न्याय की मांग को लेकर   जवान और उनक...
23/05/2026

#कानपुर: इंसाफ की मांग ने बढ़ाई हलचल

मां का इलाज के दौरान हाथ काटे जाने के मामले में न्याय की मांग को लेकर जवान और उनके साथी #पुलिस_कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। मामले ने #चिकित्सा_लापरवाही, जांच प्रक्रिया और न्याय व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

निष्पक्ष जांच और न्यायपूर्ण कार्रवाई ही विश्वास को मजबूत करती है।

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) चुनाव: मतगणना पर सुप्रीम कोर्ट की रोक बरकरारसुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) चुन...
23/05/2026

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) चुनाव: मतगणना पर सुप्रीम कोर्ट की रोक बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) चुनावों की मतगणना पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और बैलेट पेपर से छेड़छाड़ के आरोपों को गंभीर माना है।

वर्तमान स्थिति: • मतगणना अगली न्यायिक कार्यवाही तक स्थगित रहेगी।

• मामले से संबंधित याचिकाओं को शीघ्र सुनवाई हेतु दिल्ली हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ के समक्ष भेजा गया है।

• चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को बनाए रखने पर न्यायालय ने विशेष जोर दिया है।

विवाद का आधार: • चुनाव प्रक्रिया में बैलेट पेपर से कथित छेड़छाड़ और चुनावी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।

• कुछ रिपोर्टों में बड़ी संख्या में बैलेट पेपर में कथित हेरफेर की बात सामने आई है, हालांकि इन आरोपों पर अभी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।

• चुनाव प्रक्रिया के दौरान अव्यवस्था और आचार संहिता उल्लंघन के आरोप भी सामने आए।

Disclaimer:-
कानूनी दृष्टि से यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अभी ये आरोप न्यायिक परीक्षण और जांच के अधीन हैं; इन्हें अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी महिला के चरित्र या "पवित्रता" को पुराने पितृसत्तात्मक नजरिए से नहीं देखा जा सकता। महिला की ...
23/05/2026

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी महिला के चरित्र या "पवित्रता" को पुराने पितृसत्तात्मक नजरिए से नहीं देखा जा सकता। महिला की गरिमा, निजता और यौन स्वायत्तता (sexual autonomy) संविधान के तहत संरक्षित अधिकार हैं।

कोर्ट ने माना कि किसी महिला के निजी स्नान/अंतरंग वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड करने की धमकी देना उसकी गरिमा, निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। ऐसे कृत्य को गंभीर आपराधिक धमकी (criminal intimidation) माना गया।

BNS के अनुसार:
यह मामला IPC के समय का था, जहाँ धारा 506 IPC लागू हुई थी। IPC के स्थान पर अब भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 लागू है। वर्तमान में ऐसा कृत्य सामान्यतः BNS की धारा 351 (Criminal Intimidation / आपराधिक भयादोहन) के अंतर्गत आ सकता है, और परिस्थितियों के अनुसार आईटी कानून व महिलाओं की निजता से संबंधित अन्य प्रावधान भी जुड़ सकते हैं।

(सुप्रीम कोर्ट निर्णय दिनांक: 22 मई 2026)
Case: Vijayakumar v. State of Tamil Nadu

Bench: न्यायमूर्ति Sanjay Karol एवं न्यायमूर्ति N. Kotiswar Singh

Justice Vikram Nath एवं Justice Sandeep Mehta की पीठ द्वारा असम के मस्टर रोल/वर्क-चार्ज कर्मचारियों से संबंधित मामले में...
23/05/2026

Justice Vikram Nath एवं Justice Sandeep Mehta की पीठ द्वारा असम के मस्टर रोल/वर्क-चार्ज कर्मचारियों से संबंधित मामले में निर्णय;
गौहाटी हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच के फैसले को निरस्त किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर नियमितीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता कि प्रारंभिक नियुक्ति स्वीकृत पद के विरुद्ध नहीं थी, यदि कर्मचारी लंबे समय से लगातार नियमित प्रकृति का कार्य कर रहे हों।

(Supreme Court Judgment dated 21 May 2026 )
(Bench: Justice Vikram Nath & Justice Sandeep Mehta)
– Assam Muster Roll Workers Regularisation Case.

“The language of the FIR should be a decent one... FIR/complaint is the gateway of any criminal case and decent expressi...
23/05/2026

“The language of the FIR should be a decent one... FIR/complaint is the gateway of any criminal case and decent expression would well communicate the alleged atrocities faced by her.”

एफआईआर किसी भी आपराधिक मामले का प्रारम्भिक आधार होती है। न्यायालय ने कहा कि FIR में अनावश्यक अश्लील शब्दों और गालियों को हूबहू लिखने के बजाय शालीन एवं संयत भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए, ताकि तथ्य स्पष्ट रहें और गरिमा भी बनी रहे।

न्याय केवल प्रक्रिया नहीं, बल्कि मर्यादा और संवेदनशीलता का भी विषय है।

रोहित शर्मा, अधिवक्ता
उच्च न्यायालय, इलाहाबाद

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Plot No 61/179 Yogendra Vihar
Kanpur
208021

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Tuesday 11am - 5pm
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