एडवोकेट महेन्द्र चाहर

  • Home
  • India
  • Jaipur
  • एडवोकेट महेन्द्र चाहर

एडवोकेट महेन्द्र चाहर Lawyer - Raj. High Court & Lower Court

Handled various cases related to Civil, Criminal, Arbitration Mediation Bank, Insurance, Company matters, Service matter matrimonial, Motor Vehicle Act, Consumer Cases, Cases related to N.I.Act and family matters.

राजस्थान सरकार  का  नया  आदेश  जरूर  देख  ले  रोड  पर  प्लॉट खरीदते  वक़्त नेशनल हाईवे ,स्टेट हाईवे, ग्रामीण रोड़ पर  प्...
27/02/2026

राजस्थान सरकार का नया आदेश जरूर देख ले रोड पर प्लॉट खरीदते वक़्त
नेशनल हाईवे ,स्टेट हाईवे, ग्रामीण रोड़ पर प्लॉट ख़रीद करते वक़्त निम्न बातों का ख्याल रखें l

1. नेशनल हाईवे सेंटर से 246 फीट (75 मीटर) में आवासीय और कमर्शियल बिल्डिंग दूर होनी चाहिए। सेंटर से 245 फीट छोड़कर खरीदे l

2. स्टेट हाईवे: स्टेट हाईवे के सेंटर से भी 246 फीट (75 मीटर) में आवासीय और कमर्शियल बिल्डिंग दूर होनी चाहिए।246 फीट छोड़कर खरीदे
3. ग्रामीण रोड: ग्रामीण रोड के सेंटर से 15.5 मीटर) सेण्टर से लगभग 50 फीट अंदर में आवासीय और कमर्शियल बिल्डिंग नहीं होनी चाहिए। 50 छोड़कर सेंटर से खरीदे
अब, प्लॉट हाइवे पर खरीदते वक्त कुछ और सावधानियाँ:
ग्रीन बफर ज़ोन: कई शहरों में हाईवे या रोड के किनारे ग्रीन बफर ज़ोन होता है, जहाँ निर्माण की अनुमति नहीं होती। इसकी जानकारी ज़रूर लें।
- मास्टर प्लान: शहर का मास्टर प्लान देखें कि प्लॉट किस ज़ोन में आता है और वहाँ क्या निर्माण की अनुमति है।
- जमीन का नक्शा: जमीन का नक्शा देखें और सुनिश्चित करें कि प्लॉट पर कोई विवाद नहीं है।
- अतिक्रमण: आसपास के इलाके में अतिक्रमण की स्थिति देखें और भविष्य में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की संभावना को ध्यान में रखें।
- नियमों का पालन: स्थानीय नियमों और गाइडलाइंस का पालन करना आवश्यक है, जैसे कि जमीन का उपयोग, निर्माण की अनुमति, आदि।
इन बातों का ध्यान रखने से आप अपने निवेश को सुरक्षित रख सकते हैं।

Lawyer unity long live…
17/01/2026

Lawyer unity long live…

14/01/2026
सुप्रीम कोर्ट ने तलाक से जुड़े कानून को लेकर एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि पति-पत्न...
15/12/2025

सुप्रीम कोर्ट ने तलाक से जुड़े कानून को लेकर एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि पति-पत्नी के बीच सुलह या साथ रहने की कोई वास्तविक संभावना शेष नहीं है, तो अदालत तलाक की अनुमति दे सकती है और इसके लिए 6 महीने की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि (Cooling Period) का इंतजार करना जरूरी नहीं होगा।

आपसी सहमति से तलाक में राहत-

अदालत ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-B के अंतर्गत तलाक के मामलों में 6 महीने की अवधि का उद्देश्य पति-पत्नी को पुनर्विचार और सुलह का अवसर देना है, न कि उन्हें जबरन टूटे रिश्ते में बांधे रखना।
यदि अदालत यह संतुष्ट हो जाए कि विवाह पूरी तरह टूट चुका है और दोनों पक्ष लंबे समय से अलग रह रहे हैं, तो इस अवधि को माफ किया जा सकता है।

मानसिक पीड़ा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता-

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून को मानवीय दृष्टिकोण से लागू किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में जहां दांपत्य जीवन केवल कानूनी औपचारिकता बनकर रह गया हो, वहां 6 महीने का अतिरिक्त इंतजार दोनों पक्षों के लिए अनावश्यक मानसिक पीड़ा का कारण बन सकता है।

पहले भी दिए जा चुके हैं ऐसे संकेत-

अदालत ने अपने पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए दोहराया कि-

जब विवाह में विश्वास, सम्मान और साथ रहने की भावना पूरी तरह समाप्त हो चुकी हो

और दोनों पक्ष स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ना चाहते हों
तो अदालत का कर्तव्य है कि वह उन्हें सम्मानजनक निकास (dignified exit) प्रदान करे।

हर मामला अपने तथ्यों पर तय होगा-

हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 6 महीने की अवधि को स्वतः समाप्त नहीं किया गया है।
यह छूट हर मामले के तथ्यों, परिस्थितियों और न्यायिक संतुष्टि पर निर्भर करेगी। अदालत यह जरूर देखेगी कि

सुलह के सभी प्रयास असफल हो चुके हों

दोनों पक्षों के बीच कोई दबाव या ज़बरदस्ती न हो

बच्चों और आर्थिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान हो चुका हो

निष्कर्ष-
यह फैसला उन दंपतियों के लिए राहत लेकर आया है जो वर्षों से कानूनी प्रक्रिया में फंसे हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि कानून का उद्देश्य रिश्तों को जबरन ढोना नहीं, बल्कि न्याय देना है।








#तलाककानून

09/11/2025

Handled various cases related to Civil, Criminal, Arbitration Mediation Bank, Insurance, Company matters, Service matter matrimonial, Motor Vehicle Act, Consumer Cases, Cases related to N.I.Act and family matters.
Lawyer - Raj. High Court & Lower Court

Supreme Court rules three-year practice as lawyer necessary to be eligible for judicial service |
20/05/2025

Supreme Court rules three-year practice as lawyer necessary to be eligible for judicial service |

In a significant judgment, the Supreme Court today ruled that a candidate should have at least three years of practice as a lawyer to enter judicial service. Th

Address

Jaipur

Telephone

09929077527

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when एडवोकेट महेन्द्र चाहर posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to एडवोकेट महेन्द्र चाहर:

Share