15/06/2026
नेपाल के विराटनगर स्थित होटल में बिहार निवासी प्रिंस यादव की संदिग्ध मृत्यु के मामले में कानूनी प्रक्रिया मुख्य रूप से नेपाल के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) और अंतरराष्ट्रीय कांसुलर नियमों के अंतर्गत संचालित होती है, क्योंकि घटना नेपाल की सीमा के भीतर हुई है।ऐसे मामलों में जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया नेपाल के घरेलू आपराधिक कानूनों के अनुसार होती है, जबकि भारत सरकार केवल कांसुलर सहायता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग व्यवस्था के तहत भूमिका निभाती है।
नेपाल पुलिस की जिम्मेदारी नेपाल के प्रचलित आपराधिक कानूनों (Nepal Penal Code एवं Criminal Procedure Code) के तहत मामले की जांच करना है।पुलिस सबसे पहले मामला दर्ज करती है, घटनास्थल का निरीक्षण करती है, सीसीटीवी फुटेज, होटल रजिस्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक/भौतिक साक्ष्य एकत्र करती है तथा गवाहों और मृतक के साथ मौजूद व्यक्तियों से पूछताछ करती है।यदि मृत्यु संदिग्ध या अप्राकृतिक पाई जाती है, तो नेपाल के कानून के अनुसार पोस्टमार्टम कराया जाता है ताकि मृत्यु के कारण का वैज्ञानिक और कानूनी निर्धारण हो सके।यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो उसे हिरासत में लेकर नेपाल के आपराधिक कानूनों के तहत अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
भारत सरकार की भूमिका मुख्यतः अंतरराष्ट्रीय कांसुलर कानूनों (Vienna Convention on Consular Relations, 1963) और भारत के विदेश मंत्रालय के कांसुलर दिशानिर्देशों के अंतर्गत आती है।इन प्रावधानों के अनुसार, विदेश में किसी भारतीय नागरिक की मृत्यु होने पर भारतीय दूतावास को परिजनों को सूचना देने, स्थानीय प्रशासन से समन्वय करने, आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कराने और पार्थिव शरीर को भारत लाने में सहायता प्रदान करने का अधिकार और जिम्मेदारी होती है।दूतावास द्वारा मृत्यु प्रमाणपत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, और अन्य कानूनी औपचारिकताओं के आधार पर अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, भारत और नेपाल के बीच पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (Mutual Legal Assistance Treaty - MLAT) के अंतर्गत दोनों देश आपराधिक मामलों में सहयोग करते हैं।इस संधि के तहत साक्ष्यों का आदान-प्रदान, गवाहों के बयान, दस्तावेजों की उपलब्धता, और सीमा-पार जांच में सहायता प्रदान की जाती है, जिससे यदि मामला आपराधिक प्रकृति का हो तो दोनों देशों की एजेंसियाँ समन्वय में कार्य कर सकें।
बिहार सरकार की भूमिका मुख्यतः प्रशासनिक और मानवीय सहायता तक सीमित होती है।राज्य सरकार मृतक के परिजनों को सहायता प्रदान करती है, जिला प्रशासन के माध्यम से कागजी प्रक्रियाओं में सहयोग देती है तथा केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास के साथ समन्वय स्थापित कर पार्थिव शरीर को बिहार लाने में सहायता करती है।साथ ही, यदि परिवार न्याय की मांग करता है तो राज्य सरकार सक्षम प्राधिकरणों से निष्पक्ष जांच की अनुशंसा कर सकती है।इस प्रकार, इस मामले में नेपाल पुलिस अपने घरेलू आपराधिक कानूनों के तहत जांच करती है, भारत सरकार Vienna Convention on Consular Relations (1963) और MLAT जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत सहायता प्रदान करती है, और बिहार सरकार प्रशासनिक एवं मानवीय सहयोग की भूमिका निभाती है।अंतिम निर्णय और कानूनी निष्कर्ष नेपाल की जांच रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायालय के आदेशों के आधार पर ही निर्धारित होता है।