27/08/2026
हमारा देश स्वाभाविक रूप से लोकतांत्रिक है। सदियों से हमने मानवीय मूल्यों का सम्मान किया है और शासन में लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार दिया है। समय बीतता गया, आक्रमणकारी आए और हमारी मूलभूत शक्तियों को नष्ट कर दिया। आज हम एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं, हर कोई हमारी प्राचीन संस्कृति की अपने-अपने तरीके से व्याख्या कर रहा है ताकि सस्ती लोकप्रियता हासिल कर सके और वोट बैंक को मजबूत कर सके। हम विदेशी साजिश को नहीं समझ पा रहे हैं। विशेष रूप से युवा पीढ़ी को गलत बातें बताई जा रही हैं। भारत में ज्यादातर लोग आरक्षण, मुफ्त योजनाओं और सरकारी नीतियों जैसे लाभ प्राप्त करने के लिए खुद को गरीब और पिछड़ा हुआ होने का दिखावा करते हैं। सच्चाई यह है कि अर्थव्यवस्था तेजी से विकास कर रही है, प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है, योग्य युवाओं के लिए नौकरी या स्टार्टअप के अवसर कई गुना बढ़ गए हैं। अगर हम स्पष्ट कारणों से केवल सरकारी नौकरियों की तलाश में हैं, तो यह मुश्किल है, लेकिन अन्य रास्ते खुले हैं। आइए हम चालाक राजनेताओं के जाल में न फंसें। मैंने विदेशों में देखा है कि वे अपनी आर्थिक स्थिति या सामाजिक पिछड़ेपन/वर्गीकरण के लिए कभी भी अपने देश को दोष नहीं देते या उस पर अफसोस नहीं जताते। हालांकि दुनिया के हर हिस्से में अमीर-गरीब, शिक्षित-अशिक्षित, नस्लीय भेदभाव, औपनिवेशिक प्रभाव और क्षेत्रीय वर्चस्व के लिए गुटबाजी जैसी असमानताएं मौजूद हैं, फिर भी देश अपनी सरकारों को अपना काम करने देते हैं। विपक्ष राष्ट्र को मजबूत करने में रचनात्मक भूमिका निभाता है। लोकतंत्र का अर्थ संविधान का अपमान करना नहीं है। किसी भी नागरिक को संविधान की मनमानी व्याख्या करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जय हिंद, जय भारत वंदे मातरम।