वशिष्ठ विधि वार्षिकी

वशिष्ठ विधि वार्षिकी 78 वर्षों से निरंतर प्रकाशित विधि पत्रिका ( क़ानूनी डायरी )

⚖️ संदेह के आधार पर उम्रकैद नहीं! MP हाई कोर्ट की पुलिस को कड़ी फटकार।मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते ...
18/07/2026

⚖️ संदेह के आधार पर उम्रकैद नहीं! MP हाई कोर्ट की पुलिस को कड़ी फटकार।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उम्रकैद के दोषी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पुलिस की लचर जांच, CDR और सबूतों के साथ छेड़छाड़ पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्याय की जीत और पुनर्वास के इस बड़े आदेश को हर किसी को जानना चाहिए।

👇 पूरी कानूनी रिपोर्ट पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें। 👇
https://vidhivarshiki.com/news/e4e46521-9c3a-4881-9506-a94cd36b185e

ऐसे ही ख़बरों की जानकारी व्हाट्सप्प पर पाने हेतु हमारे व्हाट्सप्प चैनल से जुड़े नीचे लिंक पर क्लिक करें और ज्वाइन करें 👇
https://whatsapp.com/channel/0029Va9FuboICVfjskj2iM3r

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: क्या सिर्फ रजिस्टर्ड होने से वसीयत कानूनी रूप से पक्की हो जाती है? जानिए कोर्ट का अह...
25/06/2026

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: क्या सिर्फ रजिस्टर्ड होने से वसीयत कानूनी रूप से पक्की हो जाती है?

जानिए कोर्ट का अहम निर्णय।

इंदौर पीठ ने संपत्ति विवाद (FA-497-2008) से जुड़े एक मामले में साफ किया है कि वसीयत चाहे पंजीकृत (Registered) ही क्यों न हो, जब तक उसके अटेस्टिंग गवाह की गवाही कोर्ट में नहीं होती, तब तक उसे कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता।

'द विधि टाइम्स' (वशिष्ठ विधि वार्षिकी समूह) के इस विशेष कानूनी विश्लेषण में समझें:
👉 सिर्फ वसीयत का रजिस्ट्रेशन क्यों काफी नहीं है?
👉 संयुक्त संपत्ति खरीदते समय खरीदारों को किस बड़ी बात का ध्यान रखना चाहिए? 👇

पूरी कानूनी रिपोर्ट और केस की बारीकियां पढ़ने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें:
👉🔗 https://vidhivarshiki.com/news/da246014-3a40-4b10-bc0c-f84526d102fe

⚖️ 80 वर्षों से अधिवक्ताओं का विश्वसनीय साथी ⚖️📖 वशिष्ठ विधि वार्षिकी 2027यह केवल एक डायरी नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के लिए...
19/06/2026

⚖️ 80 वर्षों से अधिवक्ताओं का विश्वसनीय साथी ⚖️

📖 वशिष्ठ विधि वार्षिकी 2027

यह केवल एक डायरी नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के लिए वर्षभर उपयोगी विधिक जानकारी का संक्षिप्त एवं सुव्यवस्थित संग्रह है, जिसमें प्रमुख अधिनियमों, महत्वपूर्ण कानूनी पुस्तकों एवं आवश्यक संदर्भ सामग्री का सार एक ही स्थान पर उपलब्ध है।

🎁 इस वर्ष विशेष उपहार:

✅ FREE Digital Profile (₹299 मूल्य)

✅ FREE E-Diary Software (₹999 मूल्य – 1 वर्ष हेतु)

✅ आधुनिक डिजिटल सुविधाओं के साथ पारंपरिक विश्वसनीयता

💼 हर अधिवक्ता के लिए उपयोगी – कार्यालय, न्यायालय एवं दैनिक पेशेवर कार्यों हेतु।

📞 अपनी प्रति सुरक्षित करने हेतु अभी व्हाट्सप्प करें 9039979688।

🌐 vidhivarshiki.com

01/05/2026

⚖️ *MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पुलिस की 'फर्जी' कहानी बेनकाब!हत्या के मामले में*

14 साल बाद सभी आरोपी बरी। कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी ने झूठे सबूत गढ़े थे। मुख्य बातें:
🔹 कोर्ट ने जांच अधिकारी (I.O.) के खिलाफ FIR दर्ज करने के दिए आदेश।
🔹 शव पंचनामा और पुलिस की थ्योरी में मिला भारी विरोधाभास।
🔹 हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी- "निर्दोषों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं।"

पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें:👇👇👇
https://vidhivarshiki.com/news/57a66879-b10b-4c65-a79e-7dd0af5e7582

*The Vidhi Times - वशिष्ठ विधि वार्षिकी समूह*

⚖️ MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पुलिस की 'फर्जी' कहानी बेनकाब!हत्या के मामले में 14 साल बाद सभी आरोपी बरी। कोर्ट ने पाया ...
01/05/2026

⚖️ MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पुलिस की 'फर्जी' कहानी बेनकाब!हत्या के मामले में

14 साल बाद सभी आरोपी बरी। कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी ने झूठे सबूत गढ़े थे। मुख्य बातें:
🔹 कोर्ट ने जांच अधिकारी (I.O.) के खिलाफ FIR दर्ज करने के दिए आदेश।
🔹 शव पंचनामा और पुलिस की थ्योरी में मिला भारी विरोधाभास।
🔹 हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी- "निर्दोषों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं।"

पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें:👇👇👇
https://vidhivarshiki.com/news/57a66879-b10b-4c65-a79e-7dd0af5e7582

The Vidhi Times - वशिष्ठ विधि वार्षिकी समूह

05/04/2026

I got over 500 reactions on my posts last week! Thanks everyone for your support! 🎉

भारतीय न्याय संहिता 2023 PDF फ़ाइल देखने या डाउनलोड करने हेतु स्कैन करें
03/04/2026

भारतीय न्याय संहिता 2023 PDF फ़ाइल देखने या डाउनलोड करने हेतु स्कैन करें

31/03/2026
14 अक्टूबर, 1964.जापान नेशनल स्टेडियम, टोक्यो.टोक्यो ओलंपिक्स में पुरुषों की 10,000 मीटर की दौड़ को लगभग 70,000 दर्शक दे...
29/03/2026

14 अक्टूबर, 1964.
जापान नेशनल स्टेडियम, टोक्यो.

टोक्यो ओलंपिक्स में पुरुषों की 10,000 मीटर की दौड़ को लगभग 70,000 दर्शक देख रहे थे.

शुरुआती लाइन पर श्रीलंका के रानतुंगा करुणानंदा खड़े थे, जिन्होंने बिब नंबर 67 पहना हुआ था.
बंदूक चली. 38 धावक एक साथ दौड़ पड़े.

इस दौड़ में 400 मीटर के ट्रैक के 25 चक्कर लगाने थे.
दौड़ खत्म होने से पहले ही, नौ धावक बीच में ही दौड़ से बाहर हो गए. करुणानंदा काफी पीछे रह गए थे.

जब सिर्फ़ एक चक्कर बाकी था, तब विजेता ने फिनिश लाइन पार कर ली.
उसके बाद रजत और कांस्य पदक विजेताओं ने लाइन पार की.
दौड़ आधिकारिक तौर पर खत्म हो चुकी थी.

दर्शक धीरे-धीरे जाने लगे.

लेकिन करुणानंदा ने दौड़ना बंद नहीं किया.

उन्हें अभी भी एक पूरा चक्कर लगाना बाकी था.
दौड़ खत्म होने के बाद भी, वह फिनिश लाइन की ओर दौड़ते रहे—
बेहद दर्द में, अपनी पसलियों को थामे हुए.

किसी की नज़र उन पर पड़ी.
वे हँसने लगे.
जल्द ही, दूसरे लोग भी उनके साथ हँसने लगे.

फिर... कुछ बदल गया.

किसी ने तालियाँ बजानी शुरू कीं.
एक और व्यक्ति भी उसमें शामिल हो गया.
फिर और भी लोग शामिल हो गए.

जल्द ही, पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा.

सभी 70,000 लोग अपनी सीटों से खड़े हो गए और ट्रैक पर दौड़ रहे उस आखिरी धावक का उत्साह बढ़ाने लगे.

किसी को नहीं पता था कि वह कौन है.
लेकिन हर कोई ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहा था:

“नंबर 67! नंबर 67!”

जापान के दर्शक—जो अपनी लगन और दृढ़ता के प्रति गहरे सम्मान के लिए जाने जाते हैं—उस व्यक्ति से बहुत प्रभावित हुए, जिसने दर्द और हार के बावजूद दौड़ बीच में नहीं छोड़ी.

जब करुणानंदा ने आखिरकार फिनिश लाइन पार की,
तो उन्हें स्वर्ण पदक विजेता से भी ज़्यादा तालियाँ मिलीं.

पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया और पूछा:
👉 “आपने दौड़ बीच में क्यों नहीं छोड़ी? जबकि प्रथम 3 लोग तो रेस जीत चुके थे, और बाकि लोग रेस से हट चुके थे”

उन्होंने जवाब दिया:

> “घर पर मेरी एक छोटी बेटी है.
> जब वह बड़ी होगी, तो मैं उसे बताना चाहता हूँ कि उसके पिता टोक्यो ओलंपिक्स में गए थे—और भले ही वह हार गए, लेकिन उन्होंने दौड़ पूरी की.”

एक और भी ज़्यादा दिल को छू लेने वाली बात है.

करुणानंदा श्रीलंका लौट गए, उन्हें इस बात का ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि वह जापान में एक हीरो बन चुके हैं.

उनकी कहानी को जापान के प्राथमिक विद्यालयों की पाठ्यपुस्तकों में इस शीर्षक के साथ शामिल किया गया:
“यूनिफ़ॉर्म नंबर 67.”

Address

Vashishtha Technology, 302, Garima Arcade, Shinde Ki Chhawani, Lashkar
Gwalior
474001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when वशिष्ठ विधि वार्षिकी posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share