08/07/2026
to Sell केवल कागज़ नहीं, बल्कि एक वैधानिक अधिकार है। यदि विक्रेता रजिस्ट्री से इंकार करे, तो खरीदार Specific Performance के माध्यम से न्यायालय से अपने अधिकार का प्रभावी संरक्षण प्राप्त कर सकता है।"
यदि विक्रेता (Seller) ने Sale Agreement/Agreement to Sell किया, लगभग ...% बिक्री मूल्य प्राप्त कर लिया, लेकिन अब Sale Deed (रजिस्ट्री) करने से इंकार कर रहा है, तो खरीदार (Buyer) के पास मजबूत कानूनी उपाय उपलब्ध हैं।
#खरीदार को क्या करना चाहिए?
1.Agreement to Sell और भुगतान के सभी साक्ष्य (रसीद, बैंक ट्रांजैक्शन, गवाह आदि) सुरक्षित रखें।
2.विक्रेता को Legal Notice भेजें, जिसमें रजिस्ट्री करने के लिए निश्चित समय दिया जाए।
3.यदि फिर भी रजिस्ट्री न करे, तो Specific Performance का वाद दायर करें।
🙏वाद में यह भी प्रार्थना करें कि मुकदमे के दौरान विक्रेता संपत्ति किसी तीसरे व्यक्ति को न बेच सके (अस्थायी निषेधाज्ञा/Temporary Injunction)।
#खरीदार का पक्ष कितना मजबूत होता है?
यदि खरीदार निम्न बातें सिद्ध कर दे, तो उसका पक्ष सामान्यतः काफी मजबूत माना जाता है—
1.वैध Agreement to Sell हुआ था।
2.....% या पर्याप्त भुगतान वास्तव में किया गया।
खरीदार हमेशा अनुबंध पूरा करने के लिए तैयार और इच्छुक (Ready and Willing) था।
3.विक्रेता ने बिना उचित कारण रजिस्ट्री करने से इंकार किया।
ऐसी स्थिति में न्यायालय विक्रेता को Sale Deed निष्पादित करने (Execute the Sale Deed) का आदेश दे सकता है। यदि विक्रेता आदेश का पालन न करे, तो न्यायालय के माध्यम से भी रजिस्ट्री कराई जा सकती है।
✍️किन परिस्थितियों में खरीदार का पक्ष कमजोर हो सकता है?
1.Agreement जाली या अप्रमाणित हो।
2.भुगतान का कोई विश्वसनीय प्रमाण न हो।
3.खरीदार स्वयं शेष राशि देने के लिए तैयार न रहा हो।
4.अनुबंध की आवश्यक शर्तों का पालन खरीदार ने न किया हो।
#महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय
Satish Kumar v. Karan Singh – खरीदार को अपनी readiness and willingness सिद्ध करनी होती है।
K. Narendra v. Riviera Apartments (P) Ltd. – Specific Performance न्यायालय का विवेकाधीन (discretionary) उपचार है, परंतु उचित मामलों में इसे प्रदान किया जाता है।
Relief Act, 1963 की धारा 10 (Section 10) ही वह प्रावधान है जो Specific Performance of Contract (अनुबंध के विशिष्ट पालन) से संबंधित है।
⏳संक्षेप में धारा 10 का अर्थ: यदि दो पक्षों के बीच कोई वैध अनुबंध (जैसे Agreement to Sell) हुआ है और एक पक्ष अपने वादे के अनुसार कार्य नहीं करता, तो दूसरा पक्ष न्यायालय से यह प्रार्थना कर सकता है कि केवल हर्जाना (Damages) देने के बजाय उस अनुबंध का वास्तविक पालन कराया जाए, जैसे विक्रेता को Sale Deed (रजिस्ट्री) करने का आदेश दिया जाए।
#भूमि विक्रय के मामलों में:
📍यदि Agreement to Sell वैध है,
📍खरीदार ने भुगतान किया है,
📍और वह शेष राशि देने के लिए हमेशा तैयार एवं इच्छुक (Ready and Willing) रहा है,
तो वह Specific Relief Act, 1963 की धारा 10 के अंतर्गत Specific Performance का वाद दायर कर सकता है।
#वर्तमान कानून के अनुसार:
Specific Relief Act, 1963 की धारा 10 के अंतर्गत Specific Performance का अधिकार दिया गया है।
📍मुकदमे में यह प्रार्थना की जाती है कि न्यायालय विक्रेता को Sale Deed (रजिस्ट्री) निष्पादित करने का आदेश दे।
📍यदि विक्रेता आदेश के बाद भी रजिस्ट्री नहीं करता, तो न्यायालय अपने अधिकारी के माध्यम से भी Sale Deed निष्पादित करा सकता है।
📍साथ ही वाद के साथ निम्न राहतें भी मांगी जाती हैं:
📍संपत्ति को किसी तीसरे व्यक्ति को बेचने से रोकने हेतु अस्थायी निषेधाज्ञा (Temporary Injunction)।
📍 आवश्यक हो तो स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction)।
#ध्यान दें: पहले Specific Performance एक विवेकाधीन (discretionary) राहत मानी जाती थी, लेकिन 2018 के संशोधन के बाद न्यायालय सामान्यतः वैध अनुबंधों को लागू कराने की ओर अधिक झुकाव रखते हैं, बशर्ते खरीदार यह सिद्ध करे कि वह हमेशा अनुबंध पूरा करने के लिए ready and willing था।
#वाद पत्र (PLAINT)प्रारूप
माननीय सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन), जनपद ____, उत्तर प्रदेश
नियमित मूल वाद संख्या : __ /20
वादी
श्री __ पुत्र __ निवासी __
बनाम
प्रतिवादी
श्री __ पुत्र __ निवासी __
#विशिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 की धारा 10 एवं अन्य लागू प्रावधानों के अंतर्गत विक्रय अनुबंध के विशिष्ट पालन (Specific Performance), विक्रय विलेख निष्पादन एवं स्थायी निषेधाज्ञा हेतु वाद
वाद मुलयाकन........
देय न्याय शुल्क........
#महोदय,
वादी निम्नलिखित निवेदन करता है—
1. यह कि प्रतिवादी विवादित संपत्ति का स्वामी एवं कब्जेदार है।
दिनांक //20__ को वादी एवं प्रतिवादी के मध्य उक्त संपत्ति के संबंध में लिखित विक्रय अनुबंध (Agreement to Sell) निष्पादित हुआ।
2.यह कि संपत्ति का कुल विक्रय मूल्य ₹__ निर्धारित हुआ, जिसमें से वादी ने ₹__ (लगभग 60%) प्रतिवादी को अग्रिम रूप से अदा किया। भुगतान की रसीद/बैंक अभिलेख/गवाह उपलब्ध हैं।
3.यह कि अनुबंध के अनुसार शेष धनराशि विक्रय विलेख के पंजीकरण के समय देय थी।
4.यह कि वादी सदैव अनुबंध का पालन करने, शेष धनराशि अदा करने तथा विक्रय विलेख पंजीकृत कराने के लिए तैयार एवं इच्छुक रहा है।
5.यह कि प्रतिवादी ने कई बार अनुरोध करने तथा विधिक नोटिस प्राप्त करने के बाद भी विक्रय विलेख निष्पादित नहीं किया।
प्रतिवादी अब संपत्ति को किसी तृतीय पक्ष के पक्ष में बेचने का प्रयास कर रहा है, जिससे वादी को अपूरणीय क्षति होने की संभावना है।
6.यह कि कारण-ए-वाद दिनांक //20__ को उत्पन्न हुआ तथा निरंतर जारी है। यह न्यायालय क्षेत्राधिकार एवं मूल्याधिकार दोनों दृष्टियों से सक्षम है।
#प्रार्थना/
अतः माननीय न्यायालय से निवेदन है कि—
A. प्रतिवादी को वादी के पक्ष में विवादित संपत्ति का विधिवत विक्रय विलेख निष्पादित एवं पंजीकृत करने का आदेश पारित किया जाए।
B.यदि प्रतिवादी आदेश का पालन न करे, तो न्यायालय अपने अधिकृत अधिकारी के माध्यम से विक्रय विलेख निष्पादित एवं पंजीकृत कराने का आदेश पारित करे।
C. वाद के अंतिम निर्णय तक प्रतिवादी को विवादित संपत्ति किसी तृतीय पक्ष को बेचने, गिरवी रखने, हस्तांतरित करने अथवा उस पर किसी प्रकार का तृतीय पक्ष अधिकार सृजित करने से रोका जाए।
D. वाद व्यय वादी को प्रदान किया जाए।
E. न्यायालय परिस्थितियों के अनुसार अन्य उपयुक्त राहत भी प्रदान करे।
स्थान : ____
दिनांक : //20__
वादी
(हस्ताक्षर)
अधिवक्ता
Ad-litem law associates
[email protected]
�Plaint (वाद पत्र)
�Order ###IX Rules 1 & 2 CPC के तहत Temporary Injunction Application
�Affidavit �List of Documents �Vakalatnama
�Verification�Court Fee Valuation�Legal Notice
✍️⚖️👩🎓@