23/06/2026
जिंदगी में कई बार हालात ऐसे पैदा हो जाते हैं कि आदमी मजबूर हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति बीमारी, बुजुर्ग अवस्था, विदेश में रहने या अन्य कारणों से अपने सभी काम खुद नहीं कर पाता। तब क्या हो...कानून ने ही इसका रास्ता दिखाया है। ऐसे में वह किसी भरोसेमंद व्यक्ति को अपनी ओर से काम करने का अधिकार दे सकता है। यही अधिकार एक कानूनी दस्तावेज के जरिए दिया जाता है, जिसे पावर ऑफ अटॉर्नी यानी POA कहा जाता है।
हमारे देश भारत में भारत में पावर ऑफ अटॉर्नी की व्यवस्था को Power of Attorney Act, 1882 के तहत मान्यता प्राप्त है। इसे एक कानूनी दस्तावेज माना जाता है। इसके जरिए एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को अधिकार देता है। अधिकार देने वाले को प्रिंसिपल कहा जाता है। अधिकार पाने वाले को अटॉर्नी होल्डर कहते हैं। वह प्रिंसिपल की ओर से काम कर सकता है। यह अधिकार सीमित या व्यापक हो सकता है। पावर ऑफ अटॉर्नी के दस्तावेज को लिखित रूप में बनाया जाता है।