21/07/2026
📚 **सर्विस लॉ की महत्वपूर्ण मिसाल | "काम नहीं तो वेतन नहीं" (No Work No Pay) सिद्धांत पर महत्वपूर्ण निर्णय**
⚖️ **पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय** ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि—
यदि किसी कर्मचारी को बहाल करते समय यह शर्त रखी गई हो कि वह कार्य न करने की अवधि का वेतन दावा नहीं करेगा, लेकिन बाद में **सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority)** ने विधिवत उस अवधि का वेतन स्वीकृत कर दिया हो, तो केवल पद पर आए अगले अधिकारी द्वारा "No Work No Pay" का हवाला देकर उस स्वीकृति को वापस नहीं लिया जा सकता।
✅ **माननीय न्यायालय का महत्वपूर्ण निष्कर्ष:**
🔹 एक बार सक्षम प्राधिकारी द्वारा दिया गया वैधानिक लाभ मनमाने ढंग से वापस नहीं लिया जा सकता।
🔹 केवल अधिकारी बदल जाने से पूर्व आदेश स्वतः अमान्य नहीं हो जाता।
🔹 ऐसा आदेश तभी वापस लिया जा सकता है जब वह **अधिकार-क्षेत्र से बाहर**, **कानून के प्रतिकूल** हो अथवा **धोखाधड़ी (Fraud)** से प्राप्त किया गया हो।
🔹 इसलिए कर्मचारी के वेतन को वापस लेने वाला विवादित आदेश न्यायालय ने निरस्त (Quash) कर दिया।
📖 **निर्णय:**
**Amarjeet vs. State of Haryana**
CWP No. 14490 of 2020
निर्णय दिनांक: **02.07.2026**
माननीय न्यायमूर्ति **Harpreet Singh Brar**
(पैरा 7 से 9)
⚖️ **कानूनी संदेश:**
*"प्रशासनिक निर्णयों में स्थिरता, वैध अपेक्षा (Legitimate Expectation) तथा विधि के शासन (Rule of Law) का संरक्षण न्यायपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी कर्मचारी को दिया गया वैध लाभ केवल अधिकारी बदलने के कारण छीना नहीं जा सकता।"*