19/06/2026
⚖️ **सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: तलाकशुदा पत्नी को ₹50,000 प्रतिमाह स्थायी भरण-पोषण एवं वैवाहिक घर का स्वामित्व** ⚖️
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण एवं मिसाल कायम करने वाला निर्णय देते हुए तलाकशुदा लेकिन अविवाहित पत्नी को मिलने वाली स्थायी गुजारा भत्ता (Permanent Alimony) की राशि ₹20,000 प्रति माह से बढ़ाकर ₹50,000 प्रति माह कर दी है। साथ ही प्रत्येक 2 वर्ष में 5% वृद्धि (Increment) का भी आदेश दिया गया है।
🏛️ **सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश:**
✅ पत्नी को ₹50,000 प्रति माह स्थायी भरण-पोषण।
✅ प्रत्येक 2 वर्ष में 5% की स्वचालित वृद्धि।
✅ पति को वैवाहिक घर का बकाया ऋण चुकाकर संपत्ति पत्नी के नाम हस्तांतरित करनी होगी।
✅ भरण-पोषण तय करते समय केवल वर्तमान आय नहीं, बल्कि पति की सम्पूर्ण आय क्षमता एवं जीवनशैली को भी ध्यान में रखा जाएगा।
✅ दूसरी शादी या माता-पिता की जिम्मेदारी का हवाला देकर पहली पत्नी के भरण-पोषण के अधिकार को कम नहीं किया जा सकता।
📌 **सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण अवलोकन:**
*"एक ऐसी पत्नी जो तलाक के बाद पुनर्विवाह नहीं करती और स्वतंत्र रूप से जीवन यापन कर रही है, उसे विवाह के दौरान प्राप्त जीवन स्तर के अनुरूप भरण-पोषण मिलना चाहिए जिससे उसका भविष्य सुरक्षित रह सके।"*
⚖️ **इस निर्णय का कानूनी महत्व**
यह फैसला स्पष्ट करता है कि भरण-पोषण केवल जीवित रहने के लिए न्यूनतम सहायता नहीं है, बल्कि विवाह के दौरान प्राप्त जीवन स्तर (Standard of Living) को बनाए रखने का एक कानूनी अधिकार है।
अब न्यायालय निम्नलिखित पहलुओं पर विशेष ध्यान देंगे—
🔹 वैवाहिक जीवन के दौरान जीवन स्तर
🔹 पति की वास्तविक एवं संभावित आय
🔹 महंगाई (Inflation) का प्रभाव
🔹 पत्नी की भविष्य की आर्थिक सुरक्षा
🔹 आवास, स्वास्थ्य एवं सामाजिक आवश्यकताएँ
यह निर्णय भविष्य में भरण-पोषण एवं वैवाहिक अधिकारों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
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