24/06/2026
क्या पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर सकती है?
जानिए नए कानून (BNSS, 2023) के तहत अपने अधिकार! ⚖️
देश में नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद अब पुलिस और आम जनता से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव आया है। अब पुराने CrPC की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) लागू है। आइए जानते हैं कि नए कानून के मुताबिक अगर पुलिस FIR दर्ज न करे, तो आपके पास क्या अधिकार हैं:
1. अब मना करना और भी मुश्किल (BNSS की धारा 173):
नए कानून की धारा 173 के तहत, अगर कोई संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) हुआ है, तो पुलिस को FIR दर्ज करनी ही होगी। अब इसमें 'ई-FIR' (E-FIR) का भी प्रावधान है, यानी आप इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी शिकायत भेज सकते हैं, जिस पर 3 दिन के अंदर हस्ताक्षर करने के बाद FIR दर्ज मान ली जाएगी।
2. 'प्रारंभिक जांच' (Preliminary Enquiry) का नया नियम:
BNSS में एक नया नियम है कि जिन अपराधों में सजा 3 से 7 साल के बीच है, वहाँ पुलिस अधिकारी FIR दर्ज करने से पहले 14 दिनों के भीतर एक 'प्रारंभिक जांच' कर सकता है, ताकि यह देखा जा सके कि मामला प्रथम दृष्ट्या (Prima Facie) बनता है या नहीं। लेकिन गंभीर मामलों में तुरंत FIR होगी।
3. अगर पुलिस फिर भी मना करे, तो क्या रास्ता है?
एसपी (SP) को शिकायत (धारा 173(4) BNSS): अगर थाना प्रभारी FIR नहीं लिखता, तो आप अपनी लिखित शिकायत जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को भेज सकते हैं। यदि मामला बनता है, तो वे खुद जांच करेंगे या निर्देश देंगे।
मजिस्ट्रेट के पास जाने का अधिकार (धारा 175 BNSS): पुराने CrPC की धारा 156(3) की जगह अब BNSS की धारा 175 के तहत आप सीधे मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। मजिस्ट्रेट पुलिस को जांच और FIR का आदेश दे सकते हैं।
Zero FIR को मिली कानूनी पहचान:
अब नए कानून में साफ़ कर दिया गया है कि अपराध चाहे किसी भी इलाके में हुआ हो, पुलिस तुरंत Zero FIR दर्ज करेगी और संबंधित थाने को ट्रांसफर करेगी।
सलाह: नए कानून की जानकारी ही आपको असल मायने में जागरूक बनाती है। अपने अधिकारों को जानिए और कानून का सम्मान करिए।
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