Ankush dubey

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Ankush dubey Secretary(NSUI UP )/Advocate at High Court of Allahabad

अनवरत प्रयत्न करना है भुमि अधिग्रहण से प्रभावित विस्थापित-आदिवासी-मुलनिवासी, छात्र-नौजवान के हक-हकुक की रक्षा हेतु !!

The Supreme Court of India has directed every State to set up a dedicated Special Investigation Team (SIT) to probe susp...
31/08/2026

The Supreme Court of India has directed every State to set up a dedicated Special Investigation Team (SIT) to probe suspected fraudulent motor accident insurance claims — a ruling with significant implications for MACT litigation across the country.

Case: The Oriental Insurance Co. Ltd. v. Tuni Pati & Ors.
SLP (C) No. 5582 of 2023 with Civil Appeal No. 6865 of 2026
Bench: Justices Ahsanuddin Amanullah and PB Varale
Order dated: 17 August 2026

Background: The matter began as a narrow dispute over whether a specific vehicle was genuinely involved in an accident. It expanded into a larger issue after the Court found the same insured vehicle was allegedly being repeatedly shown as the offending vehicle in multiple accidents to facilitate fraudulent claims.

Key Directions of the Court:

1)Every State to constitute a dedicated State-level SIT to investigate complaints of suspected insurance fraud

2)Insurance companies must refer all fraud-indicating claims to the respective State SIT

3)Top management of insurers will be held accountable if fraud cases are selectively referred ("pick and choose")

4)Court noted fraudulent claims strain insurers financially and ultimately raise premiums for genuine policyholders

This order strengthens the mechanism to w**d out manufactured and duplicated claims, and will shape how insurers, claimants' advocates, and Tribunals handle suspicious claim patterns going forward.

31/08/2026

बच्चियों के ट्रोलर कहाँ मिलेंगे, बीजेपी के दफ़्तर पर।।

We are Indians, firstly and lastlyDr. B.R. Ambedkar
14/08/2026

We are Indians, firstly and lastly

Dr. B.R. Ambedkar

*बैंक/वित्तीय संस्थान को ऋण वसूलने का अधिकार है, लेकिन कानून अपने हाथ में लेकर बल, धमकी अथवा गुंडों/मसलमैन के माध्यम से ...
11/08/2026

*बैंक/वित्तीय संस्थान को ऋण वसूलने का अधिकार है, लेकिन कानून अपने हाथ में लेकर बल, धमकी अथवा गुंडों/मसलमैन के माध्यम से वसूली करने का अधिकार नहीं*

(ICICI Bank Ltd. v. Shanti Devi Sharma, (2008) 7 SCC 532)

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई 2008 को फैसला सुनाया। अदालत ने बैंकों द्वारा ऋण वसूली (loan recovery) के लिए जबरन वसूली एजेंटों (recovery agents) या बाहुबलियों का उपयोग करने की कड़ी निंदा की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बैंक कानून के दायरे में रहकर ही काम करें और रिकवरी के लिए हिंसक या अपमानजनक तरीके न अपनाएं।

मामले की पृष्ठभूमि (Background)

· शांति देवी शर्मा के बेटे ने मोटरसाइकिल खरीदने के लिए आईसीआईसीआई बैंक से कर्ज लिया था।लोन नही चुका पाने पर बैंक द्वारा नियुक्त रिकवरी एजेंटों ने कथित तौर पर सार्वजनिक रूप से परिवार और पड़ोसियों के सामने अपमानित किया और धमकी दी तथा बाईक जबरदस्ती रिकवर कर ले गये।इस अपमान से दुखी होकर कर्जदार युवक ने आत्महत्या कर ली। युवक की मां (शांति देवी शर्मा) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में बैंक और उसके कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक जांच की मांग की। उच्च न्यायालय ने बैंक की कार्यशैली की आलोचना की थी, जिसके खिलाफ बैंक सुप्रीम कोर्ट गया।


सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य बिंदु (Key Rulings)

1) कानून का शासन: कोर्ट ने कहा कि हम एक सभ्य देश में रहते हैं और कानून के शासन से शासित होते हैं। बैंक कर्ज वसूली के लिए गुंडों या बाहुबलियों का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

2) आरबीआई के दिशानिर्देश: कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फेयर प्रैक्टिसेज कोड (Fair Practices Code) और रिकवरी एजेंटों के संबंध में जारी निम्न नियमों का हवाला दियाः-

॰ बैंक को अपना ऋण वसूलने का कानूनी अधिकार है, लेकिन वसूली कानून सम्मत तरीके से ही की जा सकती है।

॰ रिकवरी ऐजेन्ट को कर्जदार के साथ शालीनता और मर्यादा से व्यवहार करना चाहिए तथा उसकी निजता का सम्मान करना चाहिए।

॰ बैंक के रिकवरी ऐजेन्ट्स द्वारा धमकी, बल प्रयोग, अभद्र व्यवहार या उत्पीड़न स्वीकार्य नहीं है।

॰ सुप्रीम कोर्ट ने RBI की recovery guidelines और Code of Bank's Commitment to Customers में निर्धारित standards का उल्लेख किया, जिनमें borrowers से civil manner में व्यवहार करने की अपेक्षा की गई थी।

3) बैंक की जिम्मेदारी (Vicarious Liability): बैंक अपने एजेंटों के कृत्यों के लिए उत्तरदायी हैं। बैंक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके एजेंट वसूली के दौरान शालीनता और नियमों का पालन करें।

4) जांच के निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच का निर्देश दिया, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

“विश्व आदिवासी दिवस पर जल-जंगल-ज़मीन के रक्षक आदिवासी समुदाय को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ”आज पुरे भारत में जिस तरह से ...
09/08/2026

“विश्व आदिवासी दिवस पर जल-जंगल-ज़मीन के रक्षक आदिवासी समुदाय को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ”

आज पुरे भारत में जिस तरह से नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार तथा विभिन्न प्रदेशों की भाजपा सरकारें साम-दाम-दण्ड-भेद का उपयोग कर आदिवासी समुदाय की अस्मिता उनके जल-जंगल-ज़मीन को लुट कर मोदी जी के मित्र अड़ानी/अम्बानी को किसी भी हालत में देने पर आमादा है वह चिन्ता का विषय है। आदिवासी समुदाय को जागरुक होकर अपनी लड़ाई अब स्वयं लड़ने की आवश्यकता है।।

छात्र विरोधी यह सरकार, नहीं चाहिए अबकी बार।।
08/08/2026

छात्र विरोधी यह सरकार, नहीं चाहिए अबकी बार।।

देश के छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र के मंत्री को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया और धर्मेन्द्र प्रधान ने ट्विटर(X) पर ब...
25/07/2026

देश के छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र के मंत्री को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया और धर्मेन्द्र प्रधान ने ट्विटर(X) पर बताया है कि उन्होंने अपना इस्तीफ़ा भेज दिया है। यह छात्रों की जीत है क्योंकि लम्बे अर्से बाद स्वतः स्फुर्त आन्दोलन देखने को मिला।

मेरी तस्वीरें इलाहाबाद पत्थर गिरिजाघर(धरना स्थल सिविल लाईन, इलाहाबाद) पर छात्रों के आन्दोलन के दरम्यान की है।

एक अन्तिम बात योगी जी आप केतनो नाम बदल लो पर आज भी यह छात्रों का इलाहाबाद ही है…….

25/07/2026

The Honorable Delhi High Court and the Honorable Supreme Court of India had refused to urgently list the petition of the students/CJP who were brutally beaten by the police/RAF and had also said that the court does not have time to see the video of the petitioner student, but two days ago the Delhi High Court has agreed to hear the Public Interest Petition for investigation of the “Sansad Chalo March” by the NIA so that it can be known whether this “Sansad Chalo March” was foreign funded or politically motivated.

माननीय दिल्ली हाई कोर्ट और माननीय सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने पुलिस/RAF द्वारा बेरहमी से पीटे गए स्टूडेंट्स/CJP की पिटीशन को अर्जेंट लिस्ट करने से मना कर दिया था और यह भी कहा था कि कोर्ट के पास पिटीशनर स्टूडेंट का वीडियो देखने का टाइम नहीं है, लेकिन दो दिन पहले दिल्ली हाई कोर्ट “संसद चलो मार्च” की NIA से जांच के लिए पब्लिक इंटरेस्ट पिटीशन पर सुनवाई के लिए मान गया है ताकि यह पता चल सके कि कही यह “संसद चलो मार्च” फॉरेन फंडेड या पॉलिटिकल मोटिवेटेड तो नहीं था।

जय संविधान

25/07/2026

हो सकता है धर्मेन्द्र प्रधान १ तारीख़ को सैलरी लेने के बाद इस्तीफ़ा दे, खैर तब तक प्रोटेस्ट जारी रहना चाहिये….

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